गुलशन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:
प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा आयोजित एक सप्ताहीय क्षमता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ 24 जुलाई 2026 को ऑनलाइन माध्यम से हुआ। यह कार्यक्रम 24 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय “उच्च शिक्षा का रूपांतरण : दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम, डिजिटल एकीकरण एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण” है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों को दक्षता-आधारित शिक्षण, डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) आलोक वर्मा, प्रोफेसर एवं डीन, स्कूल ऑफ लॉ, आर.वी. विश्वविद्यालय, बेंगलुरु रहे। उन्होंने दक्षता-आधारित शिक्षा की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षमता-आधारित शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावहारिक दक्षताओं, विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता एवं व्यावसायिक कौशल का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने परिणाम-आधारित शिक्षा, सतत मूल्यांकन, डिजिटल शिक्षण एवं नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन के वास्तविक वाहक हैं।
संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) निर्मला बंदोपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं उत्कृष्टता स्थापित करने के लिए शिक्षकों का निरंतर क्षमता विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीकों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से शिक्षकों को जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
विधि विभाग की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राखी सिंह चौहान ने कहा कि आज का समय शिक्षा में नवाचार, तकनीकी समावेशन एवं विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण का है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से प्रतिभागी शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों, पाठ्यक्रम विकास, अनुसंधान की गुणवत्ता तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के समन्वयक श्री आबिल हुसैन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को समर्पित है, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा करेंगे। सह-समन्वयक डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा ने प्रतिभागियों से सभी सत्रों में सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।
आगामी सत्रों में प्रो. (डॉ.) आनंद पवार, प्रो. (डॉ.) सगी सेथु, प्रो. (डॉ.) उदय देशपांडे, प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा तथा प्रो. (डॉ.) तपन कुमार चंदोला सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशों से शिक्षाविद, विधि शिक्षक, अधिवक्ता, शोधार्थी तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ रहे हैं। अब तक 100 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हो चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सह-प्राध्यापक डॉ. अक्षय भार्गव, मानसी गुप्ता, डॉ. दीक्षा भदौरिया, ऋचा मित्तल, मानसी सोनी, जिज्ञासा वोहरा, साहिल वर्मा एवं राहुल श्रीवास्तव सहित विधि विभाग के समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सह-प्राध्यापक श्री आबिल हुसैन ने किया।
