सिरोल आंगनबाड़ी में बच्चों को स्टेशनरी, टी-शर्ट व लोअर वितरित, शिक्षा और नशामुक्ति का दिया संदेश | New India Times

संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

सिरोल आंगनबाड़ी में बच्चों को स्टेशनरी, टी-शर्ट व लोअर वितरित, शिक्षा और नशामुक्ति का दिया संदेश | New India Times

गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सिरोल, मुरार स्थित आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र में समाज की मुख्यधारा से वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को स्टेशनरी किट, टी-शर्ट और लोअर वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना तथा उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में सहयोग प्रदान करना था।

सिरोल आंगनबाड़ी में बच्चों को स्टेशनरी, टी-शर्ट व लोअर वितरित, शिक्षा और नशामुक्ति का दिया संदेश | New India Times

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अभिभावकों से प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने तथा शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों की संख्या में कमी समाज के लिए चिंता का विषय है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाए।

उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा समाज में समानता, सम्मान और आत्मविश्वास की नींव है। विशेष रूप से बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि बेटियाँ शिक्षित होंगी तो परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य और अधिक सशक्त होगा।

श्री निमराजे ने बच्चों और अभिभावकों को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि धूम्रपान, तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से स्वयं भी दूर रहें और बच्चों को भी इनसे दूर रखें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों से कभी तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थ मंगाने जैसी गलत आदतें न डालें।

उन्होंने भगवान बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि बुद्ध ने संयम, सदाचार और नशामुक्त जीवन का संदेश दिया है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है।

स्वास्थ्य एवं पोषण पर चर्चा करते हुए उन्होंने बच्चों को जंक फूड, मैगी, पास्ता तथा अन्य अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बजाय दूध, चना, दालें, हरी सब्जियाँ एवं अन्य पौष्टिक आहार का नियमित सेवन करने की सलाह दी।

कार्यक्रम में अनिल सिमोलिया एवं हिमानी वर्मा ने बच्चों को नियमित अध्ययन, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का महत्व बताया। बच्चों के साथ कविता-पाठ, प्रश्नोत्तरी और प्रेरक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे उनमें उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ।

कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं एवं अभिभावकों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। अंत में सभी बच्चों को स्टेशनरी किट, टी-शर्ट और लोअर वितरित किए गए। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ़ दिखाई दिया।

संस्था ने संकल्प व्यक्त किया कि वह भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर संचालित करती रहेगी, ताकि समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा और विकास के अवसरों से वंचित न रहे।

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