ज़फ़र खान, अकोला (महाराष्ट्र), NIT:

अडगांव बुजुर्ग में समाजसेवी और जनप्रिय व्यक्तित्व सईद खान पठान के इंतकाल की खबर से पूरे गांव में गम का माहौल छा गया। अपने मिलनसार स्वभाव और न्यायप्रिय छवि के लिए पहचान रखने वाले सईद खान पठान को क्षेत्र में एक “ब्रांड” के रूप में जाना जाता था।
सईद खान पठान ने अपने जीवनकाल में कई सामाजिक और घरेलू विवादों को आपसी समझाइश और सलाह-मशवरे से सुलझाया। उन्होंने बिना कोर्ट-कचहरी और पुलिस के हस्तक्षेप के अनेक परिवारों में शांति स्थापित कराई, खासकर गरीब और पीड़ित परिवारों की मदद में हमेशा आगे रहे।
वे गरीबों के हमदर्द और जुल्म करने वालों के खिलाफ चट्टान की तरह खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। किसी भी बेबस पर अत्याचार देख वे तुरंत उसके खिलाफ आवाज उठाते थे, जिसके चलते बड़ी संख्या में युवा उनके साथ खड़े हो जाते थे।
गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें टंटा मुक्ति समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया था। इसके अलावा वे शिवसेना (यूबीटी) से भी जुड़े रहे और पार्टी के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते थे।
उनके निधन से गांव में शोक की लहर है। युवाओं की आंखें नम हैं तो बुजुर्गों में गहरा दुख देखा जा रहा है। उन्हें आज अडगांव बुजुर्ग में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
सईद खान पठान अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिन पर इस दुख की घड़ी में मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

