वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
कस्बा कुकरा के गढ़ी स्थित प्रसिद्ध सूफ़ी दरगाह हज़रत ख़्वाजा उबैदुल ग़नी उर्फ़ मुनन मियाँ शाह कादरी चिश्ती जहांगीरी अबुल उलाई हसनी रहमतुल्लाह अलैह का 67वाँ तीन दिवसीय सालाना उर्स मुबारक मंगलवार को पूरी अकीदत, श्रद्धा और रूहानी माहौल के बीच संपन्न हो गया।
उर्स के अंतिम दिन दरगाह परिसर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज़ से आए हज़ारों ज़ायरीन ने दरगाह पर हाज़िरी देकर दुआएँ मांगीं।
उर्स के दौरान आयोजित महफ़िल-ए-क़व्वाली में देश के नामचीन कव्वालों ने सूफ़ियाना कलाम और नात-ए-शरीफ़ पेश कर ऐसा समां बांधा कि देर रात तक अकीदतमंद रूहानी रंग में सराबोर होकर झूमते रहे। पूरे आयोजन के दौरान दरगाह परिसर “या ख़्वाजा” के नारों और सूफ़ी कलामों की गूंज से महकता रहा।
इस अवसर पर मुल्क की खुशहाली, कौमी एकता, आपसी भाईचारे और अमन-चैन के लिए विशेष दुआएँ की गईं। वहीं विशाल लंगर (तबर्रुक) का आयोजन भी किया गया, जिसमें हज़ारों ज़ायरीन और स्थानीय लोगों ने शामिल होकर तबर्रुक ग्रहण किया तथा दरगाह से बरकत हासिल की।
यह तीन दिवसीय सालाना उर्स सज्जादा नशीन सूफ़ी यासीन जमीली एवं ख़लीफ़ा-ए-जमीली सूफ़ी मोहम्मद अनवर उर्फ़ बाबू मियाँ (सेनपुर बाले) की सरपरस्ती और कुशल देखरेख में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
उर्स में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, उलेमा-ए-कराम, मुरीदीन तथा दूर-दराज़ से आए हज़ारों ज़ायरीन ने शिरकत कर हज़रत मुनन मियाँ की बारगाह में अकीदत के फूल पेश किए। पूरे आयोजन में धार्मिक सौहार्द, भाईचारे और आध्यात्मिक वातावरण की सुंदर झलक देखने को मिली, जिससे कुकरा का यह ऐतिहासिक उर्स एक बार फिर यादगार बन गया।
