मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
मध्य प्रदेश आजाद कोटवार संघ द्वारा आज बुधवार को जुन्नारदेव विधायक को ज्ञापन सौंपा गया है। जिसमें उन्होंने आगामी विधानसभा शास्त्र के दौरान उनकी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की है जिसमें उन्होंने अपनी कई मांगों को अवगत कराते हुए उठाने की मांग की है।
विधानसभा हेतु प्रस्तावित प्रश्न बिंदुः
1. सेवानिवृत्ति लाभ एवं अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में:
क्या यह सही है कि शासन के आदेशानुसार कोटवारों को सेवानिवृत्ति पर ₹10000 (एक लाख रुपये) की राशि और उनके आश्रितों को सेवा में प्राथमिकता/भर्ती दिए जाने का प्रावधान है यदि हाँ, तो प्रदेश के कितने जिलों में अब तक कितने कोटवारों को इस राशि का भुगतान किया गया है और कितने बच्चों को नियुक्ति दी गई है, जिलावार संख्यात्मक विवरण दें।
2. कोटवार वर्दी आवंटन एवं उज्जैन ठेका विसंगति के संबंध में:
क्या यह सही है कि वर्ष 2023 तक मध्य प्रदेश के कोटवारों को वर्दी क्रय करने हेतु नगद राशि सीधे उनके खातों में प्रदान की जाती थी, यदि हाँ, तो अब नगद राशि बंद करके उज्जैन के तिवारी के ठेकेदारों के माध्यम से घटिया स्तर की वर्दी बांटने का निर्णय किस आधार पर लिया गया, क्या इस प्रक्रिया के लिए कैबिनेट से कोई वैधानिक आदेश पास किया गया था, यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं,
3. सी.यू.जी. (CUG) सिम आवंटन की स्थितिः
क्या शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रदेश के कोटवारों को विभागीय संचार हेतु सी.यू.जी. (CUG) सिम प्रदान की गई है. यदि हाँ. तो यह सुविधा प्रदेश के कितने जिलों में पूर्ण रूप से लागू की जा चुकी है. यदि कोटवारों को सिम नहीं दी गई है, तो इस आदेश के क्रियान्वयन में विलंब का क्या कारण है।
4. पद के नियमितीकरण एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संबंध में:
सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार प्रदेश में किसी भी पद को नियमित करने की तय समय अवधि क्या है, क्या यह सच है कि कोटवार पद आजादी के पूर्व (मालगुजारी/नवाबों के समय) से अस्तित्व में है, एवं म०प्र० भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के तहत एक राजस्व ग्राम अधिकारी है यदि हाँ तो सदियों पुरानी और आवश्यक सेवा होने के बाद भी आज दिनांक तक कोटवार पद को नियमित न किए जाने के ठोस कारण क्या हैं, जवकि इसी भू राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं में दर्ज अधिकारी जैसे पटवारी, नायव तहसीलदार, तहसीलदार आदि क्यो नियमित हुये है।
5. सेवा भूमि के मालिकाना हक (राजस्व रिकॉर्ड) के संबंध में:
आजादी के पूर्व नवाबों और मालगुजारों द्वारा कोटवारों को जीवनयापन और सेवा के बदले जो भूमियाँ (सेवा भूमि) दी गई थीं, उन्हें किस शासकीय आदेश या वैधानिक प्रावधान के तहत शासकीय भूमि घोषित किया गया, क्या ऐसा कोई आदेश वैधानिक रूप से न्यायसंगत है, यदि नहीं, तो कोटवारों को उनकी इस पारंपरिक सेवा भूमि का मालिकाना हक कब तक वापस सौंप दिया जाएगा,
6. वर्दी वितरण में भ्रष्टाचार एवं उच्च स्तरीय जांच के संबंध में:
पिछले दो वर्षों से बांटी जा रही कोटवार वर्दियों की अत्यंत दयनीय और घटिया गुणवत्ता को देखते हुए, क्या सरकार इस पूरे मामले और ठेके की प्रक्रिया की जांच किसी वैधानिक/निष्पक्ष जांच संस्था (जैसे लोकायुक्त या ई.ओ.डब्ल्यू.) से कराने का विचार रखती है यदि नहीं, तो प्रतिवर्ष शासकीय धन के इस दुरुपयोग और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए शासन की क्या योजना है
एंव राष्टीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले अधिकारी कर्मचारी या जनसेवक को किस तरह के दंड का प्रावधान सरकार करेंगी।एंव राष्टीय कोष को क्षति पहुंचाने वाले अधिकारी कर्मचारी या जनसेवक को किस तरह के दंड का प्रावधान सरकार करेंगी।
जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके से उपस्थित कोटवारों ने मांग की है कि ग्रामीण अंचल के इन 38000 कोटवारों एवं उनके लगभग पंद्रह लाख पारिवारिका सदस्यों की आवाज को विधानसभा के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाकर हमें अनुगृहीत करें, ताकि बरसों से उपेक्षित इस वर्ग को न्याय मिल सके।
