मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
शासकीय महाविद्यालय जुन्नारदेव में प्रभारी प्राचार्य की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि उन्होंने जनभागीदारी मद से स्थायीकर्मी योजना के तहत विनियमित किए गए चार कर्मचारियों के आदेश को एकतरफा तरीके से निरस्त कर दिया।
जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन में महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति तथा तत्कालीन प्राचार्य द्वारा 2 मार्च 2024 को चार जनभागीदारी कर्मचारियों को स्थायीकर्मी योजना का लाभ देते हुए उनका विनियमितीकरण किया गया था।
बाद में, 24 अक्टूबर 2025 को उच्च शिक्षा विभाग ने जनभागीदारी, स्वशासी, स्ववित्तीय एवं अन्य निधियों से कार्यरत गैर-शैक्षणिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायीकर्मी योजना से हटाने के आदेश जारी किए। इसके विरोध में संबंधित कर्मचारियों ने न्यायालय की शरण ली और 28 नवंबर 2025 को उन्हें स्थगन (स्टे) आदेश प्राप्त हो गया।
स्टे के आठ माह बाद आदेश निरस्त करने पर उठे सवाल
कर्मचारियों का कहना है कि न्यायालय से स्टे मिलने के बावजूद प्रभारी प्राचार्य ने लगभग आठ माह बाद उनके स्थायीकर्मी आदेश निरस्त कर दिए। कर्मचारियों के अनुसार, 4 जुलाई को न्यायालय के स्टे आदेश की प्रति विधिवत आवक-जावक शाखा में दर्ज कराकर प्राचार्य को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद आदेश निरस्त कर दिए गए, जिससे प्राचार्य की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
जनभागीदारी समिति को भी नहीं दी गई जानकारी
कर्मचारियों का आरोप है कि आदेश निरस्त करने से पहले जनभागीदारी समिति को भी कोई सूचना नहीं दी गई। समिति अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि प्राचार्य से पूछा जाएगा कि समिति द्वारा विनियमित किए गए कर्मचारियों के आदेश निरस्त करने से पहले समिति को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।
प्राचार्य का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में प्रभारी प्राचार्य से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
