अनंत अंबानी की अगवानी पर घिरे छतरपुर कलेक्टर, राज्यपाल व मुख्य सचिव से शिकायत | New India Times

संदीप तिवारी, भोपाल/छतरपुर/पन्ना (मप्र), NIT:

अनंत अंबानी की अगवानी पर घिरे छतरपुर कलेक्टर, राज्यपाल व मुख्य सचिव से शिकायत | New India Times

मध्य प्रदेश के छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल (आईएएस) एक नए विवाद में घिर गए हैं। दमोह जिले के हटा निवासी नागरिक राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला एक वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों के आधार पर उठाया गया है, जिसमें कलेक्टर कथित तौर पर उद्योगपति अनंत अंबानी की अगवानी करते नजर आ रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, 2-3 जुलाई 2026 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी निजी धार्मिक यात्रा पर खजुराहो पहुंचे थे। वहां से वे छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम (गढ़ा) में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात के लिए जा रहे थे। आरोप है कि इस निजी दौरे के दौरान कलेक्टर पार्थ जायसवाल स्वयं खजुराहो एयरपोर्ट पहुंचे और अंबानी की अगवानी की।
शिकायतकर्ता ने इसे प्रशासनिक मर्यादा और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला बताते हुए कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत बिना शासकीय उद्देश्य किसी निजी व्यक्ति की अगवानी करना अनुचित है। साथ ही, प्रोटोकॉल के अनुसार कलेक्टर केवल संवैधानिक पदाधिकारियों, मंत्रियों या सरकारी अतिथियों की अगवानी कर सकते हैं, जबकि अनंत अंबानी किसी शासकीय पद पर नहीं हैं।
इसके अलावा, शिकायत में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रभावशाली निजी व्यक्तियों को विशेष सुविधा देना निष्पक्ष प्रशासन के सिद्धांत के खिलाफ है। सामान्य वित्तीय नियम (GFR) के तहत यदि इस दौरान सरकारी संसाधनों—जैसे वाहन, ईंधन, पुलिस एस्कॉर्ट या स्टाफ—का उपयोग हुआ है, तो इसे दुरुपयोग माना जाएगा।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की प्रारंभिक जांच कराई जाए, कलेक्टर से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाए और दोष सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
राजा पटेरिया ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 सहित अन्य संवैधानिक उपायों का सहारा लेंगे।

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