नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जिस्म बेचने वाली महिलाओं को इंसान समझे वो कलंक नहीं है बल्की उनके पास जाने वाला व्यक्ति कलंक है। गणेश उत्सव के दौरान पुणे के बुधवार पेठ में अचानक पच्चीस गुना भीड़ बढ़ जाती है। पश्चिम बंगाल मे दुर्गा पूजा के बीच यही देखा जाता है। गांधी स्मारक निधी-युवक क्रांति दल द्वारा कोथरुड पुणे में आयोजित गांधी दर्शन शिबीर के मंच से बोल रहे पत्रकार समीर गायकवाड़ ने कहा हमने ये सब लिखा है। सामाजिक विषमता के तह मे इस विषय पर विचार व्यक्त कर रहे समीर ने अपनी निजी जिंदगी के अनुभवो में बताया कि मैं सोलापुर में मेडिकल शॉप चलाता था पंद्रह साल की लक्ष्मी को मुझसे प्यार हो गया।
लक्ष्मी और चार बहने विधवा मां के साथ सौतेले मामा के घर में रहती थी। हमारे इलाके में एक चकला चलता है। सड़क हादसे में मां के मरने के बाद मामा ने लक्ष्मी को आंध्र प्रदेश के एक दलाल को बेच दिया। हमारे इश्क़ के मशहूर किस्सों से वाकिफ नलू नाम की वैश्या से मुझे लक्ष्मी की आपबीती मालूम पड़ी। चालीस साल से अपने प्रेमी का इंतज़ार कर रही नलू ने लक्ष्मी में खुद को देखा। मैंने अपनी पत्नी को सब कुछ बताया। तीस साल तक मैं लक्ष्मी की तलाश करता रहा इस सफ़र में मैंने वैश्या व्यवसाय मे छिपी भयानक असमानता को देखा। मैं पहले कट्टर हिंदूवादी था जो आ. ह .सालुंके की क़िताबे पढ़ने के बाद विवेकवादी बन गया। लक्ष्मी की खोज में बंगाल के सोनागाछी मध्य प्रदेश के नीमच , आंध्र प्रदेश , बिहार के चतुर्भुज गया।
जिस्म बेचने के धंधे मे अधिकतर महिलाएं बंगाल ओडिशा असम झारखंड से लाई जाती है। रंग भाषा शरीर की कद काठी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कमाठीपुरा से सांगली भेजी गई नांदेड़ की मुन्नी से मिलने के बाद मेरा दिल पसीज गया। खून की उल्टियां करने वाली मुन्नी डेढ़ महीने बाद सिसक सिसक कर मर गई। पुणे में रहने वाली कर्नाटक की इलावा को माँ बाप ने देवदासी बनाकर भगवान के लिए छोड़ दिया। लक्ष्मी की तलाश मुझे इलावा तक ले गई। उसके अटैची मे देवी का फोटो था पर देवी नहीं थी। एक मंगल सूत्र राखी ब्लाउज पिस कोरी साड़ी एक पर्स मे उसके मां बाप की तस्वीर देखी।
द सेल्समैन सिनेमा से मालूम पड़ा कि महिला का बैकग्राउंड पता चलने के तुरंत बाद लोगों भूमिका बदल जाती है। सभी टैक्स पेयर्स सरकार को टैक्स देना बंद कर दीजिए सरकार अपने आप ठीक हो जाएंगी। मैं जिस लक्ष्मी को खोज रहा था वो कोरोना के समय ये दुनिया छोड़कर चली गई। मंच पर डॉ कुमार सप्तर्षि , प्रो लक्ष्मीकांत देशमुख , मुक्ता कदम , कुमार आहेर तेजस भालेराव तथा मान्यवर मौजूद रहे।
