प्रवासी भारतीयों की चुनौतियों पर राष्ट्रीय मंथन, 71 विभूतियां सम्मानित | New India Times

साबिर खान, तिरुवनंतपुरम (केरल), NIT:

प्रवासी भारतीयों की चुनौतियों पर राष्ट्रीय मंथन, 71 विभूतियां सम्मानित | New India Times

विश्वभर में बसे भारतीय मूल के लोगों के सामने उभर रही सीमा-पार पारिवारिक, सामाजिक और कानूनी चुनौतियों पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित हुआ। गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (GKSSS) के तत्वावधान में एसआरएम विश्वविद्यालय (दिल्ली-एनसीआर), इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (IIMAD), गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के संयुक्त सहयोग से GIFT परिसर में 22वीं राष्ट्रीय एक दिवसीय कार्यशाला एवं राष्ट्रीय सम्मान समारोह संपन्न हुआ।
“प्रवासी भारतीयों के सीमा-पार पारिवारिक विवाद : चुनौतियाँ, समाधान एवं विधिक सुधार” विषय पर आयोजित कार्यशाला में देशभर से आए शिक्षाविदों, न्यायविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और समाजसेवियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय विवाह, बाल अभिरक्षा, संपत्ति विवाद, घरेलू हिंसा, दोहरी नागरिकता और न्यायिक अधिकार-क्षेत्र जैसे जटिल मुद्दों पर गहन चर्चा करते हुए व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किए।

प्रवासी भारतीयों की चुनौतियों पर राष्ट्रीय मंथन, 71 विभूतियां सम्मानित | New India Times

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय वाला देश है, जहां लगभग 3.5 करोड़ भारतीय मूल के लोग विभिन्न देशों में निवास कर रहे हैं। ऐसे में प्रवासी परिवारों से जुड़े विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व के विषय बन चुके हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. (डॉ.) संदीप कुलश्रेष्ठ द्वारा शोध परियोजना के परिचय से हुई। IIMAD के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस. इरुदया राजन ने प्रवासन से बदलती सामाजिक संरचना पर प्रकाश डालते हुए शोध-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता बताई। GIFT के निदेशक प्रो. (डॉ.) के. जे. जोसफ ने कहा कि इन विवादों के समाधान के लिए सरकार, न्यायपालिका और सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय जरूरी है। संस्था अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने प्रवासी भारतीयों के लिए समन्वित राष्ट्रीय नीति बनाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पारिवारिक विखंडन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, निजी अंतरराष्ट्रीय विधि, अंतरराष्ट्रीय विवाह और OCI/दोहरी नागरिकता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
इस अवसर पर साहित्यकार विनय कुमार करुण (सजग) की कृति “हरवाही : मजबूरी या दंश” सहित दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।

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राष्ट्रीय सम्मान समारोह में 71 शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाजसेवियों को “ग्लोबल प्राइड अचीवर्स अवार्ड–2026” से सम्मानित किया गया। साथ ही डॉ. जे. नागराजन की माताजी श्रीमती जे. भुवनेश्वरी जीयाराम अम्मा को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका दत्ता ने किया। अंत में आयोजकों ने घोषणा की कि अगला आयोजन हैदराबाद और शिलांग में किया जाएगा।
यह आयोजन प्रवासी भारतीयों के अधिकारों की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और प्रभावी नीतिगत सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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