अहमद रज़ा खान, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:
यौम-ए-आशूरा (10 मुहर्रम) के अवसर पर चुनार नगर में कर्बला के शहीदों की याद में पारंपरिक ताज़िया और अलम का जुलूस पूरे श्रद्धा, अकीदत और शांतिपूर्ण माहौल में निकाला गया। यह दिन हक और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानी की याद दिलाता है, जिसे अकीदतमंदों ने नम आंखों से याद किया।
मोहल्ला बेलबीर से हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मुख्य जुलूस निकाला गया। जुलूस निर्धारित मार्ग से होते हुए रस्तोगी गली पहुंचा और पुनः बेलबीर लौटकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस दौरान कर्बला की जंग के दृश्यों को याद करते हुए युवाओं और अखाड़े के कलाकारों ने ‘बना’, ‘बनेठी’, ‘पट्टा’ और ‘डंडा’ जैसे पारंपरिक करतब प्रस्तुत कर अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जुलूस में शामिल बुजुर्गों और अकीदतमंदों ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन की शहादत इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दी गई एक महान कुर्बानी है। उन्होंने ज़ुल्म के आगे झुकने से इंकार करते हुए इंसानियत को बचाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
प्रशासन की मुस्तैदी और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ। इस मौके पर लोगों ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
