मरहूम मौलाना चाँद खान साहब धौलपुरी के इसाले सवाब में निःशुल्क हिजामा कैंप आयोजित, बड़ी संख्या में लोगों ने लिया लाभ | New India Times

यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

मरहूम मौलाना चाँद खान साहब धौलपुरी के इसाले सवाब में निःशुल्क हिजामा कैंप आयोजित, बड़ी संख्या में लोगों ने लिया लाभ | New India Times

18 जून 2026 का दिन धौलपुर के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि खिदमत, मोहब्बत और इंसानियत की एक खूबसूरत मिसाल बनकर सामने आया। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा संघ के तत्वावधान तथा डॉ. साजिद निसार (AIUTC), जोधपुर के मार्गदर्शन में मरहूम मौलाना चाँद खान साहब धौलपुरी के इसाले सवाब के लिए Hygiwell Health Care, जेल रोड, पी.जी. कॉलेज के पास, धौलपुर में निःशुल्क हिजामा कैंप का आयोजन किया गया।

यह कैंप केवल एक चिकित्सीय कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मरहूम की यादों को खिदमत के माध्यम से ज़िंदा रखने का एक प्रयास भी था। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों ने कैंप में पहुँचकर हिजामा चिकित्सा का लाभ उठाया। लोगों के चेहरों पर संतुष्टि और दुआओं की जो चमक दिखाई दे रही थी, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही।

इस अवसर पर हकीम यूनिस कुरैशी (AIUTC) ने कहा कि इंसान की असली पहचान उसके अच्छे कर्मों और लोगों के लिए की गई सेवाओं से होती है। मरहूम मौलाना चाँद खान साहब ने अपना पूरा जीवन समाज में मोहब्बत, भाईचारे और इंसानी हमदर्दी का पैगाम देने में समर्पित किया। आज का यह कैंप उसी मिशन को आगे बढ़ाने का एक छोटा-सा प्रयास है।

कैंप में डॉ. राहिल खान (PT) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे और उन्होंने इस नेक कार्य में अपना सहयोग प्रदान किया। सभी ने मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और उनके द्वारा छोड़ी गई नेक विरासत को याद किया।

वास्तव में किसी व्यक्ति के इंतकाल के बाद उसके लिए सबसे बड़ा तोहफा दुआ और सदका-ए-जारीया होता है। जब किसी की याद में लोगों के दर्द कम किए जाएँ, बीमारों को राहत दी जाए और समाज की भलाई के लिए कार्य किए जाएँ, तो वही उसके लिए सबसे खूबसूरत इसाले सवाब बन जाता है।

मरहूम मौलाना चाँद खान साहब धौलपुरी आज हमारे बीच भले ही मौजूद न हों, लेकिन उनकी यादें, उनकी शिक्षाएँ और उनके नाम पर किए जाने वाले ऐसे नेक कार्य हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेंगे।

अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए। आमीन।

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