मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीयता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद कुमार ने गंभीर रूप से घायल एक किशोर की हालत देखकर अपनी गाड़ी रुकवाई और उसके उपचार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
जानकारी के अनुसार थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के अमरेड़ी गांव निवासी 15 वर्षीय राहुल के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। उसका पालन-पोषण उसके चाचा मैनाथ द्वारा किया जा रहा है, जिनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। लगभग तीन माह पूर्व राहुल के पैर पर दीवार की ईंट गिर गई थी, जिससे उसे गंभीर चोट आई थी। आर्थिक तंगी के कारण उसका समुचित इलाज नहीं हो सका और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
बताया जाता है कि बुधवार को राहुल का चाचा उसे ई-रिक्शा से कलेक्ट्रेट परिसर लेकर सहायता की गुहार लगाने पहुंचा था। इसी दौरान शासकीय कार्य से निकल रहे एडीएम अरविंद कुमार की नजर घायल बालक पर पड़ी। उन्होंने तत्काल वाहन रुकवाया और स्वयं मौके पर पहुंचकर बच्चे की स्थिति की जानकारी ली।
किशोर की गंभीर हालत को देखते हुए एडीएम ने मौके पर ही आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही एक चिकित्सक से दूरभाष पर संपर्क कर उसके समुचित इलाज की व्यवस्था कराई और स्पष्ट निर्देश दिए कि उपचार में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने इलाज का पूरा खर्च वहन करने का आश्वासन भी दिया।
इसके बाद राहुल को तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। एडीएम ने अस्पताल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बच्चे के इलाज के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
एडीएम की इस मानवीय पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे अधिकारी समाज में सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हैं।
