ओम प्रकाश सोनी, ब्यूरो चीफ, अनुपपुर (मप्र), NIT:

राज्य सरकार जहां राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं जिले के कोतमा जनपद अंतर्गत भालूमाड़ा, कोतमा, बिजुरी और राजनगर क्षेत्रों में खनिज माफिया और पुलिस की कथित सांठगांठ से अवैध रेत खनन और परिवहन का बड़ा खेल जारी है। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि से शासन को हर माह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार कोतमा पुलिस अनुविभाग के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को दबा दिया जाता है, जबकि रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक केवई नदी, कोठी, थानगांव, बहेराबांध, कनई नदी, बेलगांव और छतई जैसे इलाकों में दर्जनों ट्रैक्टर और मिनी ट्रक अवैध रेत का परिवहन करते हैं। बताया जाता है कि इन गतिविधियों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी शामिल हैं, जो विरोध करने वालों के साथ मारपीट तक करते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजुरी थाना क्षेत्र के कुछ पुलिसकर्मी इन माफियाओं को संरक्षण देते हैं। कई बार शिकायत करने वालों पर ही फर्जी मामले दर्ज किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। एक पत्रकार के साथ मारपीट और उस पर मामला दर्ज किए जाने की घटना भी चर्चा में रही है।
सूत्रों के मुताबिक बिना ई-टीपी के रेत का अवैध भंडारण और बिक्री 5 से 10 हजार रुपये प्रति ट्रिप तक की जा रही है। कई वाहनों में नंबर प्लेट तक नहीं हैं, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो जाती है।
इस पूरे मामले में खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग को जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्षेत्र में अवैध रेत खनन से हर वर्ष करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जन क्रांति सामाजिक संस्था के पदाधिकारियों ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, खनिज आयुक्त और संभाग आयुक्त शहडोल को भेजकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
