अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:
राजस्थान में सैनिकों के लिए प्रसिद्ध झुंझुनूं जिले के आदर्श गांव धनूरी, जिसने भारतीय सेना के विभिन्न युद्धों में अनेक वीर सपूत और शहीद दिए हैं, के कायमखानी परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहम्मद अनस खान ने भारतीय सेना में कैप्टन बनकर गांव और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वह वाहिद अली खान के पोते तथा डॉ. प्रोफेसर इकराज नबी खान के पुत्र हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (Army Medical Corps) की कठिन चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर सीधे कैप्टन का पद प्राप्त किया, जिससे पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है।
कैप्टन अनस के पिता डॉ. इकराज नबी खान ने इंजीनियरिंग के बाद रुड़की से अंग्रेजी विषय में पीएचडी की। उन्होंने सरकारी सेवा के साथ-साथ विदेशी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भी अध्यापन कार्य किया है और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं।
कैप्टन अनस खान का पालन-पोषण उनके पिता डॉ. इकराज नबी खान के अलावा राज्य के प्रतिष्ठित अधिवक्ता एजाज नबी खान और उनके नाना अली मोहम्मद खान गार्ड के सान्निध्य में हुआ। एजाज नबी खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की थी तथा वर्ष 1962 में एएमयू छात्रसंघ के पहले राजस्थानी निर्विरोध उपाध्यक्ष चुने गए थे। इन सभी से कैप्टन अनस ने अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और कठिन परिश्रम के संस्कार प्राप्त किए।
कर्तव्यनिष्ठा, कड़ी मेहनत, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली की शिक्षा उन्हें परिवार से बचपन से ही मिली। तीन भाई-बहनों में उनके बड़े भाई एडवोकेट इम्तियाज खान राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में वकालत करते हैं, जबकि बड़ी बहन एमए और बीएड कर चुकी हैं। उनकी माता शिक्षित होने के साथ एक सफल गृहिणी हैं। बड़े मामा मोहम्मद अय्याज खान चूरू में एडीपी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनके फूफा इंजीनियर मुजम्मिल हुसैन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में असिस्टेंट जनरल मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
धनूरी से संबंध रखने वाला यह परिवार वर्तमान में जयपुर में निवास करता है और राजस्थान, विशेषकर कायमखानी बिरादरी में एक प्रतिष्ठित परिवार के रूप में जाना जाता है।
भारतीय सेना को बड़ी संख्या में वीर सैनिक देने वाली झुंझुनूं जिले की धनूरी धरती साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इसी वीरभूमि से निकले कैप्टन मोहम्मद अनस खान भारतीय सेना की आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में अधिकारी के रूप में सेवा देते हुए अपने परिवार, समाज और क्षेत्र की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
