रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:
नीट 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने की आशंका ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र झाबुआ के छात्रों और अभिभावकों के भविष्य पर चिंता खड़ी कर दी है।
इसी के विरोध में झाबुआ NSUI ने प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
NSUI जिलाध्यक्ष नरवेश अमलियार ने कहा कि देश के लाखों छात्र-छात्राएं हर वर्ष NEET परीक्षा में डॉक्टर बनने का सपना लेकर शामिल होते हैं। छात्रों की मेहनत, त्याग और सपनों के साथ इस व्यवस्था ने खिलवाड़ किया है। माता-पिता अपनी जमा पूंजी, कर्ज और गहने गिरवी रखकर बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों ने रात-रात भर जागकर तैयारी की, लेकिन पेपर लीक की खबरों ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। जिम्मेदारों की लापरवाही और शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।
NSUI का आरोप है कि यदि पेपर पहले ही लीक हो चुका था, तो यह सिर्फ परीक्षा नहीं बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 की AIPMT, 2024 की NEET और अब 2026 की परीक्षा में भी पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं, लेकिन हर बार नुकसान ईमानदार छात्रों को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं आर्थिक, मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
NSUI ने “NEET 2026 न्याय अभियान” शुरू करने की घोषणा करते हुए अपनी प्रमुख मांगें रखीं —
✊ NTA को तत्काल भंग किया जाए
✊ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
✊ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराई जाए
✊ छात्रों को मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता दी जाए
✊ प्रभावित छात्रों को फ्री लीगल एड उपलब्ध कराई जाए
✊ आर्थिक मुआवजा और वित्तीय सहायता दी जाए
संगठन ने मांग की कि यदि दोबारा परीक्षा आयोजित की जाती है तो छात्रों और अभिभावकों के लिए मुफ्त परिवहन, ठहरने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जाए।
NSUI ने प्रभावित छात्रों के लिए टोल फ्री नंबर 9268030030 भी जारी किया है।
प्रेसवार्ता में NSUI जिलामंत्री विनोद गणावा, संगठन मंत्री अनिल भाबोर, आशीष गुंडिया सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
