मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:
मुस्लिम समाज की महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से समाजसेवी नजम हसन द्वारा ज़म ज़म मैरिज हॉल, गौस नगर, कुंडा, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) में इस्लाह-ए-मुआशरा कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आलिमा फाज़िला मुफ्तिया आफरीन फातिमा अज़हरी, शिफा साहिबा मुंबई, बानो आपा दिल्ली सहित कई वक्ताओं ने महिलाओं और बच्चियों की दीनी एवं तालीमी तरबियत पर जोर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि दहेज लेना और देना दोनों गुनाह हैं तथा बच्चियों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देना समाज की जिम्मेदारी है। महिलाओं को पर्दे की अहमियत बताते हुए बच्चियों की बेहतर परवरिश, निगरानी और मां-बाप की खिदमत करने की नसीहत दी गई।
हजरत फातिमा के जीवन और उसूलों का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बच्चियों को दीनी तालीम के साथ अच्छे अखलाक सिखाना बेहद जरूरी है, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
कॉन्फ्रेंस में समाज के लोगों से अपील की गई कि आने वाली नस्लों को दीनी और तालीमी माहौल दें तथा बच्चियों के बेहतर भविष्य के लिए जागरूकता फैलाएं।
कार्यक्रम में नजम हसन समाजसेवक कुंडा के नेतृत्व में राहत गनी सदर साहब, फरीद सेठ उर्फ अच्छे भाई, आफताब शेख, सऊद फारुकी, खुर्शीद आलम, लाला प्रधान, डॉ. हुजैल, डॉ. शाहबाज, मेहताब फारुकी, अमन महाराष्ट्र, राष्ट्र फाज़िल अंसारी, रिजवान खान, वसीम खान, कलीम बाबा, मोहम्मद अशरफ, जुबेर प्रधान, शकील प्रधान, सानू प्रधान, डॉ. फिरोज, डॉ. फुजैल, डॉ. शीलू, अहमद उल्लाह, नौशे, प्रधान शौकत, प्रधान निजाम फारूकी, इरफान फारुकी, मोहम्मद इरफान सिद्दीकी, डॉ. इजहार, मोहम्मद जफर सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
