जुन्नारदेव में लगातार गिरता व्यापार: रोजगार के अभाव और खदानों के वादों पर उठे सवाल | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव में व्यापार दिन-ब-दिन गिरता ही जा रहा है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है। यहाँ राजनीतिक दलों द्वारा कोयला खदानें खुलवाने के झूठे सपने दिखाए गए, जबकि वे भी जानते हैं कि कोयला खदानें खुलवाना आसान नहीं है। कई खदानें घाटे के कारण पहले ही बंद की जा चुकी हैं।

कन्हान क्षेत्र से समय-समय पर कोयला खदानें खुलवाने को लेकर आवाज उठती रही है, लेकिन अब खदानों के अतिरिक्त अन्य रोजगार के संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए आम लोगों को लामबंद होने की अति आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। इससे क्षेत्र का व्यापार-व्यवसाय फिर एक बार उन्नति की ओर बढ़ सकता है।

जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र के अनेक ग्रामीण अंचलों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के संसाधनों के अभाव में निरंतर बेरोजगार युवाओं का पलायन हो रहा है। रोजगार के साधनों की कमी के कारण लंबे समय से क्षेत्र का व्यापार भी दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब व्यापारी भी पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

कई व्यापारी आसपास के ग्रामीण अंचलों में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में व्यापार करके अपनी जीविका चला रहे हैं। क्षेत्र के व्यापार-व्यवसाय के लगातार गिरने के कारणों पर भी मंथन होना चाहिए। जैसे कि जुन्नारदेव क्षेत्र के 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में अधिकांश ग्रामीण अंचलों में अलग-अलग दिनों में सप्ताह के सातों दिन बाजार लग रहे हैं। बताया जाता है कि कई ग्रामीण अंचलों में प्रशासन की बिना अनुमति के भी साप्ताहिक बाजार लगाए जा रहे हैं, जिससे शहर के मुख्य बाजार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

वहीं 90 के दशक में रेलवे और डब्ल्यूसीएल में बड़ी संख्या में कामगारों के होने के कारण क्षेत्र का व्यापार उन्नति की ओर अग्रसर था, लेकिन अब दोनों ही विभागों में कामगारों की संख्या नाममात्र की रह गई है। इसके अलावा कई अन्य विभागों के कर्मचारी अपने विभागीय मुख्यालय के अंतर्गत न रहते हुए छिंदवाड़ा और परासिया जैसे अन्य क्षेत्रों से आवागमन करते हैं। इससे क्षेत्र को आर्थिक नुकसान हो रहा है और शासकीय कार्यों में भी लापरवाही देखने को मिलती है।

इस संदर्भ में उच्च अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए। खदानों के साथ-साथ अतिरिक्त लघु उद्योग और फैक्ट्रियां स्थापित की जाएं तो रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और स्थानीय स्तर पर व्यापार को मजबूती मिल सकती है।

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