मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
Syed Haseen Akhtar का हाल ही में Nanded आगमन हुआ, जहां शहर की विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं की ओर से उनका गर्मजोशी और दिली भावनाओं के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर शहर के शैक्षणिक और साहित्यिक वातावरण में एक नई ताज़गी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपने इस सम्मानित अतिथि का पूरे आदर और सम्मान के साथ स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अपने नांदेड दौरे के दौरान सैयद हसीन अख्तर ने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के कार्यालयों का भी दौरा किया, जहां उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। Daily Waraq Taza के कार्यालय में प्रधान संपादक मोहम्मद तक़ी ने अपनी पुस्तक “मिट्टी के चांद सितारे” भेंट कर उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर शहर के जाने-माने और वरिष्ठ शायरों व साहित्यकारों—महमूद अली सहर, तमीद अहमद परवाज़, सुहैल अहमद सिद्दीकी ‘सुहैल’, जावेद अहमद, हबीब मसूद अली तथा वरक़ ताज़ा नांदेड संस्करण के संपादक नकी—की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
इसी क्रम में Daily Kamil Yaqeen के कार्यालय में भी एक गरिमापूर्ण समारोह आयोजित किया गया, जहां संपादक एम.डी. सादिक ने शॉल, गुलदस्ता और स्मृति-चिह्न भेंट कर सैयद हसीन अख्तर का सम्मान किया। इस अवसर पर Mumbai Urdu News के रिपोर्टर एडवोकेट एम.डी. शाहिद, मराठी समाचार पत्र Shramik Lok Rajya के संपादक द्विजद तारिक हसन, प्रसिद्ध उर्दू लेखिका सादिया फातिमा, अब्दुल खालिक सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
अपने संबोधन और अनौपचारिक बातचीत के दौरान सैयद हसीन अख्तर ने उर्दू भाषा और साहित्य के सामने मौजूद चुनौतियों पर गंभीरता और गहरी समझ के साथ विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में उर्दू साहित्य का विकास और प्रसार के साथ-साथ उन लेखकों और शायरों को प्रोत्साहन देना शामिल है, जिन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से उर्दू भाषा को समृद्ध किया है।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि मराठवाड़ा के साहित्यकारों को उनका उचित सम्मान और स्थान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि अवसरों के असमान वितरण की भावना समाप्त हो और हर क्षेत्र के साहित्यकारों को समान अवसर मिल सकें। उनके इस संकल्प का उपस्थित लोगों ने ज़ोरदार स्वागत किया और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में उर्दू साहित्य को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि उर्दू भाषा और साहित्य के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सकारात्मक और आशाजनक पहल साबित हुआ, जिसने नांदेड के साहित्यिक जगत में नई ऊर्जा का संचार किया।
