मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
आज की प्रतिस्पर्धा और चकाचौंध भरी जिंदगी में सीमित आय वाला गरीब मजदूर भी साधन-संपन्न लोगों से पीछे नहीं रहना चाहता। बड़े-बड़े सपने देखने वाला गरीब व्यक्ति ब्याज, लोन, समूह और फाइनेंस जैसी विभिन्न कंपनियों के माध्यम से मोबाइल, टीवी, फ्रिज, कूलर सहित अन्य सामग्री खरीद लेता है।
कई लोग फाइनेंस कराए गए सामान की मासिक किस्तें नियमित रूप से जमा कर देते हैं, किन्तु अधिकांश उपभोक्ताओं को यह समझ नहीं आता है कि नगद खरीदने पर 10 हजार रुपये कीमत वाली वस्तु भारी-भरकम ब्याज दर के कारण 12 से 14 हजार रुपये तक की कीमत में पड़ती है।
वहीं, सूत्रों की मानें तो अधिकतर दुकानदार उपभोक्ताओं को फाइनेंस कराए गए सामान पर लगने वाली ब्याज दर की सही जानकारी भी नहीं देते। अनेकों दुकानों के साइन बोर्ड पर 0% फाइनेंस अंकित रहता है, जिससे सीधे तौर पर ब्याज दर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।
ऐसे में सही जानकारी नहीं मिलने के कारण आम उपभोक्ता अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। किस्तों की अदायगी में भी कई बार भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नियमित समय सीमा पर किस्त की अदायगी नहीं करने पर 500 रुपये तक का अतिरिक्त पेनाल्टी चार्ज भी लगाया जाता है, जिससे गरीब उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो जाती है।
