अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने औकाफ-ए-शाही की वर्तमान प्रबंध कमेटी पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने कहा कि कमेटी की निष्क्रियता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते भोपाल रियासत से जुड़े हज यात्रियों की महत्वपूर्ण ‘रुबात’ सुविधा वर्षों से बाधित है।
हाजी इमरान हारून ने बताया कि सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का और मदीना में भोपाल के पूर्व शासकों द्वारा हज यात्रियों के ठहरने के लिए निशुल्क रुबात (धर्मशाला) का निर्माण कराया गया था। इस सुविधा से हज यात्रियों को लगभग एक लाख रुपये तक की राहत मिलती थी और यह व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू रूप से संचालित होती रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि औकाफ-ए-शाही की वर्तमान कमेटी की लापरवाही के कारण पहले मदीना रुबात की सुविधा बंद हुई और अब मक्का रुबात भी प्रभावित होने की स्थिति में है। पिछले कई वर्षों से हज यात्रियों को इस सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हाजी इमरान ने कहा कि कमेटी के कई सदस्य अधिक आयु और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं, वहीं मुतवल्ली की भी इस विषय में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई दे रही है। परिणामस्वरूप बीते छह वर्षों से मदीना रुबात बहाल नहीं हो सकी है, जबकि इसके लिए कई प्रयासों में लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते मक्का रुबात के नवीनीकरण (तस्नीफ) की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
हाजी इमरान हारून ने केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय हज कमेटी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि सऊदी सरकार से सीधे संपर्क कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि आने वाले हज सीजन से पहले भोपाल के हज यात्रियों को रुबात में ठहरने की सुविधा पुनः मिल सके।
उन्होंने यह भी मांग की कि यदि रुबात सुविधा बहाल नहीं हो पाती है, तो हज यात्रियों को उसके समकक्ष आर्थिक राहत प्रदान की जाए।
