मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:
जिले में आयोजित “यवतमाल जिला कृषि महोत्सव” को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। किसानों के हित में आयोजित इस महोत्सव में करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आर्थिक वर्ष के अंत में जल्दबाजी में कार्यक्रम आयोजित कर निधि खर्च करने का प्रयास किया गया।
महोत्सव पांच दिनों तक चल रहा है, लेकिन भीषण गर्मी में किसानों को बुलाने को लेकर प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह आयोजन किसानों के वास्तविक हित से ज्यादा भीड़ दिखाने और बजट खर्च करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
एक ही एजेंसी को बार-बार ठेका मिलने पर संदेह
महोत्सव के लिए टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, मुख्य डोम निर्माण का ठेका अकोला में पहले काम कर चुकी “श्री इवेंट” एजेंसी को दिया गया है। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की आशंका जताई जा रही है।
सबसे विवादित पहलू यह है कि अकोला और यवतमाल के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच निजी संबंध होने की चर्चा है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
20 लाख के सांस्कृतिक कार्यक्रम में टेंडर प्रक्रिया गायब
महोत्सव के अंतिम दो दिनों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए करीब 20 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया, लेकिन इसके लिए कोई औपचारिक निविदा (टेंडर) प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। “डिजाइन प्रोडक्शन” नाम की एजेंसी को सीधे काम दिए जाने का आरोप है।
स्थानीय लोगों की अनदेखी
जिले में उपलब्ध स्थानीय इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, मंडप व्यवसायियों और कलाकारों को मौका नहीं दिया गया। बाहरी एजेंसियों को प्राथमिकता देने से स्थानीय रोजगार पर असर पड़ा है।
निधि के केंद्रीकरण का आरोप
विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग खर्च दिखाए जाने के बावजूद, काम एक ही एजेंसी को मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि पूरा फंड एक ही जगह केंद्रित हो रहा है।
मूल सवाल कायम
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह महोत्सव वास्तव में किसानों के हित के लिए है या फिर सरकारी फंड के इस्तेमाल का माध्यम बन गया है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। यदि प्रशासन ने जल्द ही स्पष्ट जवाब नहीं दिया, तो विवाद और बढ़ सकता है।
