रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:
झाबुआ जिले के मेघनगर में पवित्र माह रमज़ान अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 27वीं रमज़ान की रात, जिसे शबे कद्र के रूप में खास अहमियत दी जाती है, मुस्लिम समाजजनों ने पूरी रात जागकर इबादत की। इस दौरान मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ में कुरआन शरीफ मुकम्मल किया गया और विशेष दुआएं मांगी गईं।
रमज़ान के इस मुबारक महीने में बड़े बुजुर्गों के साथ-साथ मासूम बच्चों ने भी पूरे रोजे रखकर इबादत में हिस्सा लिया। 11 वर्षीय तनवीर मेहमुद शिशगर ने बताया कि रमज़ान में रोजा रखना, नमाज़ पढ़ना और तिलावत करना उन्हें बेहद अच्छा लगता है और समय का पता ही नहीं चलता कि कब इफ्तार का वक्त हो जाता है।

वर्तमान में रमज़ान का तीसरा अशरा चल रहा है, जिसे दोजख से निजात का अशरा कहा जाता है। इस दौरान अधिक से अधिक इबादत कर अल्लाह से मगफिरत और रहमत की दुआ मांगी जाती है। कई मुस्लिमजन आखिरी दस दिनों में एतेकाफ में बैठकर खुद को दुनिया से अलग रखते हुए इबादत में लीन हो जाते हैं।
इस्लामिक मान्यता के अनुसार शबे कद्र की रात की इबादत का सवाब 83 वर्षों की इबादत के बराबर माना जाता है, इसलिए इस रात को विशेष महत्व दिया जाता है।
ईद-उल-फितर को लेकर भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मेघनगर में चांद देखने के बाद ही ईद का ऐलान किया जाएगा। यदि 20 मार्च को चांद दिखाई देता है तो 21 मार्च को ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा।
चांद के दीदार के बाद मुस्लिम समाज के लोग ईद-उल-फितर, जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है, खुशी और उत्साह के साथ मनाएंगे।
