जुमातुल विदा पर मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, गुनाहों से तौबा और मुल्क में अमन-चैन की मांगी गई दुआ | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रमज़ान के आखिरी जुमे जुमातुल विदा के मौके पर मस्जिदों में नमाज अदा की और गुनाहों से तौबा करते हुए मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज से पहले मस्जिदों में अलविदा का खुतबा भी सुना गया।

मौलाना सलमान ने अपने बयान में कहा कि रमज़ान का महीना इबादत और रहमत का पैगाम देता है। उन्होंने शबे कद्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमज़ान के अंतिम अशरे का विशेष महत्व होता है। शबे कद्र एक बेहद बरकत वाली रात है, जिसके बारे में कुरआन मजीद में पूरी सूरह (सूरतुल कद्र) मौजूद है। कुरआन शरीफ में इस रात को एक हजार महीनों से बेहतर बताया गया है।

उन्होंने बताया कि शबे कद्र रमज़ान के अंतिम दस दिनों की विषम रातों (21, 23, 25, 27, 29) में से किसी एक रात में हो सकती है, हालांकि मुसलमानों के बीच 27वीं रात को अधिक मान्यता दी जाती है।

मौलाना ने कहा कि जैसे दुनिया कमाने वालों का एक सीजन होता है, उसी तरह रमज़ान के आखिरी अशरे में नेकी कमाने का विशेष अवसर होता है।

जुमातुल विदा का मुबारक दिन

उन्होंने कहा कि जुमातुल विदा का दिन दुआओं की कबूलियत का दिन माना जाता है। इस दिन लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और रहमत की दुआ करते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ रमज़ान को अलविदा कहना है, नमाज को नहीं। जिस तरह रमज़ान के दौरान लोग नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं, उसे आगे भी जारी रखना चाहिए।

साहिबे निसाब पर जकात फर्ज

हाफिज रिजवान साहब ने कहा कि जिस व्यक्ति पर जकात फर्ज है, उसे अपने माल की जकात जरूर निकालनी चाहिए। जकात देने से माल पाक और साफ हो जाता है और उसमें बरकत होती है। उन्होंने कहा कि जो रोजेदार सदका-ए-फितर अदा नहीं करता, उसका रोजा आसमान और जमीन के बीच लटका रहता है और उसे पूरी तरह कबूल नहीं किया जाता।
उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि ईद के मौके पर अपने साथ-साथ रिश्तेदारों, शहरवासियों और पूरे देश में अमन-शांति के लिए दुआ करें।

ईद का चांद दिखते ही रमज़ान होता है समाप्त

मौलाना ने कहा कि रमज़ान के 29 या 30 रोजे पूरे होने के बाद जब ईद का चांद दिखाई देता है, तो रमज़ान का पाक महीना समाप्त हो जाता है और ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार साल में एक बार आता है और मुसलमानों के लिए खुशी और भाईचारे का संदेश लेकर आता है।

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