जन्म प्रमाणपत्र पर रिपोर्ट लगाने के लिए पैसे लेते सचिव का वीडियो वायरल, निलंबन के बाद भी उठे कई सवाल | New India Times

अबरार अली, ब्यूरो चीफ, सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

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इटवा विकास खंड के एक सचिव का जन्म प्रमाणपत्र पर रिपोर्ट लगाने के लिए पैसे लेते हुए कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। हालांकि इस कार्रवाई के बावजूद आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि केवल निलंबन से क्या भ्रष्टाचार की घटनाओं पर अंकुश लग पाएगा और इससे आम लोगों को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।

जानकारी के अनुसार, इटवा विकास खंड के सचिव हरेन्द्र नाथ पाण्डेय का 7 मार्च 2026 को उनके इटवा स्थित आवास पर जन्म प्रमाणपत्र से संबंधित रिपोर्ट लगाने के लिए पैसे लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर उच्चाधिकारियों ने उन्हें निलंबित कर दिया। हालांकि वायरल वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कुछ महीने पहले एंटी करप्शन टीम ने इटवा तहसील के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में खास सुधार नजर नहीं आया।

जन्म प्रमाणपत्र को लेकर बढ़ रही परेशानियां

जन्म प्रमाणपत्र बनवाने को लेकर क्षेत्र में इन दिनों काफी हलचल है। कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी उन्हें ब्लॉक और तहसील के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और प्रक्रिया में एक से दो महीने तक का समय लग जाता है। ऐसे में बिचौलियों की सक्रियता भी बढ़ जाती है, जिससे आम लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी सेवा को लेकर कमी या भ्रम की स्थिति पैदा होती है, तब बिचौलिए इसका फायदा उठाते हैं और लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। इसलिए प्रशासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कानून को लेकर लोगों में भ्रम

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2023 के तहत अक्टूबर 2023 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों के लिए जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है, जबकि उससे पहले जन्म लेने वालों के लिए अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी मान्य हैं। बावजूद इसके कई लोग पूरी जानकारी के अभाव में अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं।

प्रक्रिया में सुधार की जरूरत

वायरल वीडियो से विभाग की छवि भी प्रभावित हुई है। ऐसे में आवश्यक है कि विभाग भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करे। साथ ही जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा कर इसे सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम हो सके।

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