कृषि व्यापार समझौते पर खुली चर्चा जरूरी, नहीं तो छोटे किसानों पर पड़ेगा संकट: शबिस्ता ज़की | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

कृषि व्यापार समझौते पर खुली चर्चा जरूरी, नहीं तो छोटे किसानों पर पड़ेगा संकट: शबिस्ता ज़की | New India Times

भोपाल नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता ज़की ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश के नेताओं के सामने मंच से कहा कि आज मुद्दा केवल एक ट्रेड डील का नहीं है, बल्कि देश के अन्नदाता के भविष्य का है।

कृषि व्यापार समझौते पर खुली चर्चा जरूरी, नहीं तो छोटे किसानों पर पड़ेगा संकट: शबिस्ता ज़की | New India Times

उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी की सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता करती है, तो उसके हर पहलू पर खुली और पारदर्शी चर्चा होना जरूरी है।

शबिस्ता ज़की ने कहा कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी, आधुनिक मशीनें, बीमा और सरकारी संरक्षण मिलता है, जबकि भारत का किसान पहले से ही कर्ज और बढ़ती लागत के दबाव में है।

यदि ऐसे में विदेशी गेहूँ, मक्का और डेयरी उत्पाद सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में आते हैं, तो छोटे और मध्यम किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। यह समान प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि असमान परिस्थितियों में मुकाबला है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के स्तर पर भारत से सब्सिडी घटाने की बात की जाती है, जबकि विकसित देश अपनी सहायता जारी रखते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह व्यवस्था वास्तव में संतुलित है।

शबिस्ता ज़की ने कहा कि यह विषय केवल अनाज तक सीमित नहीं है। बीजों पर पेटेंट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बढ़ता नियंत्रण किसानों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। डेयरी क्षेत्र में भी लाखों ग्रामीण महिलाएँ और छोटे पशुपालक जुड़े हुए हैं। यदि विदेशी उत्पाद बड़े पैमाने पर बाजार में आए, तो उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने मांग की कि हर कृषि संबंधी समझौता संसद में विस्तृत चर्चा के लिए लाया जाए, किसान संगठनों से संवाद और सहमति ली जाए, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए और छोटे किसानों व डेयरी क्षेत्र के लिए आय सुरक्षा की ठोस व्यवस्था बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि देश को व्यापार और विकास दोनों चाहिए, लेकिन ऐसा कोई निर्णय नहीं होना चाहिए जिससे किसानों के हितों को नुकसान पहुँचे, क्योंकि यदि किसान कमजोर होगा तो देश की आत्मनिर्भरता भी कमजोर होगी।

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