यूपी में सबसे सख्त POCSO फैसला: बाल यौन अपराधियों को मौत की सजा | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष POCSO कोर्ट ने एक बेहद जघन्य और संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पूर्व जूनियर इंजीनियर रामभवन (50 वर्ष) और उनकी पत्नी दुर्गावती (47 वर्ष) को 33 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, अश्लील वीडियो बनाने और उन्हें डार्क वेब पर बेचने के अपराध में मौत की सजा (फांसी) सुनाई गई है।

मुख्य तथ्य

यह अपराध 2010 से 2020 के बीच बांदा और चित्रकूट जिलों में किया गया।

आरोपी बच्चों को ऑनलाइन गेम, पैसे और खिलौनों का लालच देकर फंसाते थे और उनका यौन शोषण करते थे।

बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो डार्क वेब पर विदेशी देशों तक बेचे गए, जिससे मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर का बन गया।

सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को इंटरपोल की सूचना के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी।

जांच में पेन ड्राइव से 34 बच्चों के वीडियो और 689 फोटो बरामद हुए, लेकिन कोर्ट ने 33 पीड़ितों की पुष्टि की।

कोर्ट ने इस अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (सबसे दुर्लभ और जघन्य अपराध) करार दिया।

दोषियों को POCSO एक्ट, IPC की धारा 377, 120B और IT एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया।

पीड़ितों को मुआवजा

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। आरोपियों की जब्त संपत्ति और नकदी भी पीड़ितों में बांटी जाएगी। साथ ही बच्चों के पुनर्वास, मानसिक काउंसलिंग और सुरक्षा के आदेश दिए गए हैं।

फांसी अभी नहीं हुई

कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को मौत की सजा सुनाई है, लेकिन अभी फांसी नहीं दी गई है। भारत में मौत की सजा के बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार होता है, और सजा की पुष्टि के बाद ही फांसी की तारीख तय होती है। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं।

यह फैसला उत्तर प्रदेश में बच्चों के यौन शोषण मामलों में एक सख्त और ऐतिहासिक मिसाल माना जा रहा है, जिससे समाज को कड़ा संदेश मिला है कि ऐसे अपराधों पर कोई दया नहीं बरती जाएगी।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version