गर्भवती से सरेआम बर्बरता में 'श्रीराम सेना-दुर्गा वाहिनी' ने उठाया न्याय का बीड़ा, SDOP के मानवीय आश्वासन से जगी आस | New India Times

मोहम्मद सिराज, ब्यूरो चीफ, पांढुर्णा (मप्र), NIT:


शहर के गुरु नानक वार्ड में एक 8 दिन की गर्भवती महिला के साथ हुई अमानवीय मारपीट और पुलिस विवेचना में हुई एक संभावित ‘कागजी चूक’ को सुधारने के लिए अब ‘श्रीराम सेना अंतरराष्ट्रीय महासंघ’ और ‘दुर्गा वाहिनी’ ने शालीनता से मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को इन संगठनों ने पीड़ित परिवार के साथ पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन सौंपकर अजन्मे बच्चे के लिए न्याय की गुहार,लगाई। घटना 18 फरवरी की है, जब पड़ोसियों— पवन कवडे, निर्मला कवडे और सागर कवडे ने गर्भवती सुनीता कवडे पर जानलेवा हमला कर सरेआम उनके बाल पकड़कर उन्हें जमीन पर घसीटा था। उस खौफनाक मंजर के बीच 70 वर्षीय ससुर सुखदेव कवडे और चाचा ससुर रमेश कवडे अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी बहू और ‘अजन्मे पोते’ की रक्षा के लिए हमलावरों से भिड़ गए थे। इस मामले में पांढुर्णा पुलिस ने तत्परता और ईमानदारी दिखाते हुए FIR (क्र. 0093/2026) के पेज 4 पर पूरी सच्चाई दर्ज की कि पीड़िता को बाल पकड़कर गिराया गया और गर्भवती होने की जानकारी के बावजूद पीटा गया। लेकिन, संभवतः कार्य की अधिकता और भारी दबाव के चलते पुलिस से धाराओं के चयन में एक ‘तकनीकी चूक’ हो गई और FIR में मात्र साधारण मारपीट (BNS 115) की ‘जमानती’ धाराएं ही दर्ज हो पाईं। इसी त्रुटि को सुधारने के लिए संगठनों के साथ आज वही बुजुर्ग ससुर और चाचा अपने पोते के हक के लिए ज्ञापन देने पहुंचे। संगठनों ने कानूनी साक्ष्यों के आधार पर विनम्रतापूर्वक मांग की है कि FIR में सरेआम चीरहरण के लिए ‘लज्जा भंग’ की गैर-जमानती धारा (BNS 74) और ‘गर्भ को नुकसान पहुंचाने के प्रयास’ की धारा (BNS 89/62) तत्काल बढ़ाई जाए। इस दौरान पांढुर्णा पुलिस का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी सामने आया। अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) श्री बृजेश भार्गव ने स्वयं यह ज्ञापन स्वीकार किया और पीड़ित परिवार की पीड़ा को बहुत आत्मीयता से सुना। SDOP श्री भार्गव ने परिवार को आश्वस्त किया है कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह उनके साथ खड़ा है और इस ‘चूक’ को सुधारते हुए जो भी निष्पक्ष व कठोर कार्रवाई बनती है, वह हर संभव मदद के साथ की जाएगी। खाकी के इस सकारात्मक व मानवीय आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार और शहरवासियों में न्याय के प्रति एक नई उम्मीद जगी है।

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