रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:
रहमतों और बरकतों वाला मुकद्दस महीना माहे रमज़ान आज दिनांक 18 फरवरी से शुरू हो गया है। रमजान के मुबारक मौके पर बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ देखी गई। माहे रमज़ान की विशेष नमाज तरावीह आज 18 फरवरी की रात से पढ़ी जाएगी और सुबह सेहरी के साथ रोज़े का एहतमाम किया जाएगा। मुस्लिम समाज के बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं रोज़ा रखकर नमाज और कुरान की तिलावत कर इबादतों में मशगूल रहेंगे।
रोज़े की नियत:
“बिसव्मि गदिन नवैतु मिन शहरि रमज़ान”
नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने शाबान की आखिरी तारीख में सहाबा को वाज़ फरमाया। हजरत सलमान रज़ी अल्लाहू तआला अन्हू से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कि तुम्हारे ऊपर एक बहुत बड़ा और मुबारक महीना आ रहा है।
माहे रमज़ान में एक रात शबे क़द्र होती है, जो हजार महीनों से बेहतर है। अल्लाह तआला ने इस महीने के रोज़े को फ़र्ज और रात के क़ियाम (तरावीह) को सवाब की चीज बनाया है।
जो व्यक्ति इस महीने में नेकी करता है, वह ऐसा है जैसे गैर रमज़ान में फ़र्ज अदा किया, और जो व्यक्ति इस महीने में एक फ़र्ज अदा करता है, वह ऐसा है जैसे गैर रमज़ान में सत्तर फ़र्ज अदा किए।
यह महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है।
यह महीना लोगों के साथ हमदर्दी और ग़मख़्वारी करने का भी है।
माहे रमज़ान में मोमिन का रिज़्क बढ़ा दिया जाता है। जो व्यक्ति किसी रोज़ेदार को इफ्तार कराता है, उसके लिए गुनाहों की माफी और जहन्नम की आग से निजात का सवाब है, और उसे रोज़ेदार के बराबर सवाब मिलेगा, बिना उसके सवाब में कोई कमी किए।
सहाबा ने अर्ज किया कि हर व्यक्ति के पास इतनी क्षमता नहीं होती कि वह रोज़ेदार को इफ्तार करा सके। इस पर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कि एक खजूर, पानी का एक घूंट या लस्सी का एक घूंट पिलाने पर भी अल्लाह सवाब देता है।
माहे रमज़ान में विशेष नमाज तरावीह, कुरान की तिलावत, खैरात, ज़कात और सदका दिया जाता है। माहे रमज़ान के मुकम्मल होने पर चांद के दीदार के बाद ईद-उल-फितर (मीठी ईद) मनाई जाएगी।
