अशफाक कायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:
राजस्थान में कांग्रेस के लिए मजबूत गढ़ माने जाने वाले शेखावाटी क्षेत्र के साथ नागौर जिले को मिलाने पर लगता है कि दोनों राष्ट्रीय दलों के सामने यहां रालोपा और माकपा तीसरे विकल्प के तौर पर नजर आती हैं। लेकिन गत लोकसभा चुनाव में इन दोनों राजनीतिक दलों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके नागौर से हनुमान बेनीवाल और सीकर से कामरेड अमरा राम को सांसद जरूर बनवाया, लेकिन ये दोनों दल इस क्षेत्र की सभी 31 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं हैं।
इनसे हटकर तीसरे विकल्प देने के लिए कुछ लोग अलग से प्रयास कर रहे हैं, जिसके पीछे बड़े लोगों की सोच और सहयोग काम कर रहा है।
जानकारी के अनुसार कुछ थिंक टैंक इस कोशिश में लगे हुए हैं कि वे एक राजनीतिक दल बनाकर सीकर की आठ, झुंझुनूं की सात, चूरू की छह और नागौर की दस विधानसभा सीटों को मिलाकर कुल 31 विधानसभा सीटों पर जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार उतारें।
योजना यह है कि दोनों राष्ट्रीय दलों के उम्मीदवारों की जाति से हटकर, टिकट से वंचित बिरादरियों से मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएं और अन्य बिरादरियों का समूह बनाकर दोनों राष्ट्रीय दलों को चुनौती दी जाए।
इस तीसरे विकल्प की कोशिश में लगे लोगों ने कुछ साल पहले “राजपूत-कायमखानी सहभागी परिवार” नामक संगठन बनाकर जगह-जगह सम्मेलन किए और एक विशेष भावना को उभारने का प्रयास किया। अब चर्चा है कि वे एक राजनीतिक दल बनाकर अन्य बिरादरियों को जोड़ेंगे और अगले विधानसभा व लोकसभा चुनाव में उतरेंगे।
बताया जा रहा है कि यह लोग “सुराज पार्टी (SSP)” नामक राजनीतिक दल बनाकर अगले तीन साल तक पूरे क्षेत्र में बैठकें और जनसंपर्क करेंगे, और दो साल बाद लाखों की भीड़ वाली बड़ी सभा कर अपने पत्ते खोल सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह देखना दिलचस्प होगा कि “सुराज पार्टी” के थिंक टैंक वास्तव में तीसरा विकल्प देकर राजनीतिक हलचल पैदा कर पाते हैं या नहीं। लेकिन जानकारी के अनुसार, दोनों राष्ट्रीय दलों से टिकट पाने वाले उम्मीदवारों की जाति से हटकर विकल्प देने की कोशिशों से चुनाव प्रचार में नए मुद्दे हावी होते नजर आ सकते हैं।
