वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

मितौलगढ़ नरेश महाराज लोने सिंह द्वारा रचित दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों का औपचारिक हस्तांतरण संपन्न हुआ। यह हस्तांतरण महाराज लोने सिंह के राजपुरोहित वंशज राम शंकर दीक्षित द्वारा किया गया।
पांडुलिपियों के हस्तांतरण का प्रमुख उद्देश्य उनका वैज्ञानिक अध्ययन, डिजिटलीकरण तथा दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित करना है, जिससे यह अमूल्य धरोहर भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
इस अवसर पर श्री गोकर्ण फाउंडेशन द्वारा संचालित श्री गोकर्ण शोध कला एवं संस्कृति संस्थान के निदेशक विक्रांत सिंह परमार एवं प्रबंध निदेशक कमल नयन शुक्ला मितौली पहुँचे और राजपुरोहित वंशज राम शंकर दीक्षित से भेंट की। विधिवत पत्राचार एवं स्टांप प्रक्रिया पूर्ण करते हुए पांडुलिपियों का हस्तांतरण संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के मुख्य सहयोगी राजकुमार सिंह उपस्थित रहे। साथ ही आशू सिंह एवं राघवेंद्र दीक्षित गवाह के रूप में मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति में यह ऐतिहासिक प्रक्रिया पूर्ण हुई।
इसी क्रम में संस्थान के प्रतिनिधियों द्वारा 19वीं सदी के खैराबाद के नाज़िम तथा महाराज लोने सिंह के दीवान रहे राजा हकीम मेहंदी अली ख़ान के प्रपौत्र मोहसिन मेहंदी अली ख़ान से भी भेंट की गई।
इस दौरान क्षेत्रीय इतिहास, प्रशासनिक परंपराओं एवं ऐतिहासिक स्रोतों पर सार्थक चर्चा हुई, जिसे भविष्य के शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
साथ ही महाराज लोने सिंह द्वारा दान की गई भूमि का पत्र भी मोहसिन मेहंदी अली ख़ान से प्राप्त हुआ, जिस पर महाराज लोने सिंह की मुहर एवं हस्ताक्षर अंकित थे।
श्री गोकर्ण शोध कला एवं संस्कृति संस्थान ने आश्वासन दिया कि प्राप्त पांडुलिपियों का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण, अध्ययन एवं इतिहास लेखन में उपयोग किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय सामने आ सकें।
