मेघनगर में शाबान का चांद नजर आते ही शब-ए-बारात की रौनक, 3 फरवरी को इबादतों की रात, 4 फरवरी को रोज़े का एहतमाम | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

शाबान का चांद नजर आने के बाद जिस मुकद्दस रात का मुस्लिम समुदाय को बेसब्री से इंतजार था, वह आखिरकार आ ही गई। पूरे देश के साथ-साथ मेघनगर में भी 3 फरवरी को शब-ए-बारात अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जा रही है।

इस मौके पर मुस्लिम समुदाय में खासा उत्साह देखा जा रहा है। 3 फरवरी की रात इबादत, ज़िक्र और जागरण (रतजगा) किया जाएगा, जबकि 4 फरवरी को रोज़ा रखा जाएगा। बच्चे, बुज़ुर्ग, मर्द और खवातीन रात भर मस्जिदों और घरों में नफ़्ल नमाज़, कुरआन की तिलावत और दुआओं में मशगूल रहेंगे। सहरी के बाद रोज़ा रखा जाएगा और 15वीं शाबान की शाम मगरीब की नमाज़ के बाद रोज़ा इफ्तार किया जाएगा।
इस बार पूरे भारत में शब-ए-बारात 3 फरवरी की आधी रात से शुरू होकर 4 फरवरी तक मनाई जा रही है। हदीस के अनुसार, कुछ लोग इस मौके पर दो या तीन नफ़्ली रोज़े भी रखते हैं।

माह-ए-शाबान को इस्लाम में बेहद पाक और बरकत वाला महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस रात की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है और सच्चे दिल से की गई तौबा से गुनाहों की माफी मिलती है।

भारत में इसे शब-ए-बारात कहा जाता है, जबकि सऊदी अरब सहित अन्य देशों में इसे लैलतुल बराअत या लैलतुन निस्फ़-ए-शाबान कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह रात शाबान माह की 15वीं तारीख की रात होती है।

‘शब’ का अर्थ रात और ‘बारात’ का अर्थ बरी होना यानी माफी की रात है।

शब-ए-बारात की फज़ीलत (हदीस के अनुसार):

हदीसों में आता है कि इस रात अल्लाह तआला अपनी मखलूक की ओर खास तवज्जो फरमाता है और शिर्क, कत्ल, रिश्ते तोड़ने वालों और वालदैन की नाफरमानी करने वालों को छोड़कर बाकी सभी को माफ फरमा देता है।

मगफिरत और इसाले-सवाब की रात:

शब-ए-बारात को मगफिरत, बख्शिश और फैसलों की रात माना जाता है। इस रात मरहूमों के लिए इसाले-सवाब किया जाता है। लोग कब्रिस्तानों में जाकर अपने दिवंगत परिजनों के लिए दुआ, फातिहा और दरूद पढ़ते हैं। मान्यता है कि इस रहमत भरी रात में अल्लाह तआला कई रूहों को अज़ाब से निजात अता फरमाता है।

घर-घर में मीठे पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें दुआ के बाद गरीबों और जरूरतमंदों में तक्सीम किया जाता है। मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास साफ-सफाई और सजावट देखने को मिलती है।

इस्लाम की चार मुकद्दस रातों में से एक:

शब-ए-बारात को इस्लाम की चार मुकद्दस रातों में से एक माना गया है—

1. आशूरा की रात (माह-ए-मोहर्रम)

2. शब-ए-मेराज (माह-ए-रज्जब)

3. शब-ए-बारात (माह-ए-शाबान)

4. शब-ए-कद्र (माह-ए-रमज़ान)

आज शब-ए-बारात की रात में इबादतों का सिलसिला पूरी रात जारी रहेगा।

By nit

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