गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:
केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद गौ-संरक्षण की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। गौ माता के नाम पर जहां एक ओर राजनीति और कागज़ी योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर गौशालाओं में गौवंश को न चारा मिल रहा है, न पानी और न ही इलाज।
उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जनपद के अकबरपुर विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसवा में स्थित गौशाला की स्थिति देख किसी का भी मन विचलित हो सकता है। यहां गौवंश के संरक्षण के नाम पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।
सरकारी अभिलेखों में जहां गौवंश की संख्या 200 से अधिक दर्शाई जा रही है, वहीं धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। गौवंश के भरण-पोषण के लिए हर माह लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन न तो पर्याप्त चारे की व्यवस्था है और न ही उचित देखरेख।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान चुन्नीलाल और ग्राम सचिव हरिशंकर वर्मा की मिलीभगत से चारे के नाम पर भारी अनियमितता की जा रही है। चारे का पैसा प्रधान के खाते में जाने की भी बात सामने आ रही है, जो जांच का विषय है।
चारे और उपचार की उचित व्यवस्था न होने के कारण गौवंश की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।
बीमार और कमजोर गायें तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं। मौत के बाद उनके शवों को गौशाला परिसर के पास ही गड्ढे खुदवाकर डाल दिया जाता है, जिन पर मिट्टी तक नहीं डाली जाती। परिणामस्वरूप आवारा कुत्ते शवों को नोच-नोच कर खा रहे हैं।
हिंदी दैनिक विधान केसरी एवं News9 की टीम ने मौके पर देखा कि किस प्रकार बीमार और मृत गौवंश को कुत्ते नोच रहे थे, लेकिन ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
गौरतलब है कि अकबरपुर विकासखंड की इस गौशाला में गोपालकों की संख्या भी बेहद कम है। बीमार गौवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। ग्रामीण सड़कों पर घूम रही निराश्रित गायों को गौशाला पहुंचाते हैं, लेकिन यहां संरक्षण के बजाय उनकी मौत हो रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान और सचिव की घोर लापरवाही के कारण यह भयावह स्थिति बनी है। उन्होंने जिलाधिकारी अंबेडकर नगर अनुपम शुक्ला से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ गो-क्रूरता अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
बताया जा रहा है कि गौशाला के नोडल अधिकारी एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) तथा बीडीओ राजेंद्र तिवारी तक शिकायत पहुंचने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल यह है कि आखिर इन बेजुबान जानवरों की मौत का जिम्मेदार कौन है?
