Edited by Ankit Tiwari, NIT:

लेखक: डॉ मनोज कुमार तिवारी, वरिष्ठ परामर्शदाता एसआरटीसी, एस एस हाॅस्पिटल,आईएमएस बीएचयू, वाराणसी
शादी का बंधन केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण भावनात्मक सहारा भी होता है। कुछ लोग जीवनभर अविवाहित रहकर किसी विशेष उद्देश्य के लिए स्वयं को समर्पित कर देते हैं, लेकिन अधिकांश अविवाहित लोग समय के साथ अकेलापन महसूस करने लगते हैं, जो आगे चलकर मानसिक समस्याओं का कारण बनता है।

शादीशुदा जीवन में परिवार और बच्चों का साथ व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है। वहीं अविवाहित व्यक्तियों में अकेलापन, सामाजिक दबाव और रिश्ते बनाने में कठिनाई जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। विभिन्न शोधों के अनुसार विवाहित लोगों की तुलना में अविवाहित लोगों में तनाव और अवसाद का स्तर अधिक पाया गया है।
अकेली महिलाओं पर किए गए शोध बताते हैं कि उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं, गंभीर चोटों, दुर्घटनाओं तथा समायोजन संबंधी कठिनाइयों का सामना अधिक करना पड़ता है। साथ ही कई बार उन्हें आर्थिक असुरक्षा का भी सामना करना पड़ता है। अधिकांश अविवाहित महिलाएं यौन उत्पीड़न के भय से ग्रस्त रहती हैं, जिससे निराशा, चिंता, अवसाद, उदासी और अलगाव जैसी मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक स्टडी के अनुसार विवाहित लोगों की तुलना में सिंगल व्यक्तियों में हृदय रोगों का खतरा लगभग 5 प्रतिशत अधिक पाया गया है। विश्व स्तर पर लगभग 47.35 मिलियन पुरुष और 41.81 मिलियन महिलाएं अविवाहित हैं। पिछले दो दशकों में अविवाहित लोगों की संख्या 21 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
एक सर्वे के अनुसार लगभग 23 प्रतिशत युवा शादी नहीं करना चाहते। वर्ष 2019 में 26.1 प्रतिशत पुरुष और 19.9 प्रतिशत महिलाएं विवाह से दूरी बनाए हुए थीं। सरकार की एक रिपोर्ट (2019) के अनुसार शादी न करने वाले युवाओं की सर्वाधिक संख्या जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पाई गई।
हालांकि यह भी देखा गया है कि सभी अविवाहित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं होते। कुछ लोग मजबूत सामाजिक नेटवर्क, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विकास के कारण बेहतर मानसिक स्थिति में भी रहते हैं।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह लेख गृहस्थ जीवन जीने वाले सामान्य व्यक्तियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है। वैराग्य धारण करने वाले साधु-संतों के लिए अविवाहित जीवन आनंददायक एवं उत्तम मानसिक स्वास्थ्य का साधन होता है, क्योंकि उनकी जीवनशैली, सोच और अपेक्षाएं सामान्य व्यक्तियों से भिन्न होती हैं।
अविवाहित रहने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण:
• आर्थिक स्वतंत्रता
• उच्च शिक्षा
• करियर पर अधिक ध्यान
• जीवनशैली में बदलाव
• विवाह के बाद की जिम्मेदारियों से बचने की इच्छा
• समाज में बढ़ती स्वीकृति
• लिव-इन रिलेशनशिप का बढ़ता चलन
• एकल परिवार की अवधारणा
• समाजीकरण में कमी
• आत्मनिर्भरता के बढ़ते अवसर
• स्वेच्छाचारी सोच
• आधुनिक और सशक्त दिखने की प्रवृत्ति
संभावित मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं:
अकेलापन:
लंबे समय तक अकेले रहने से अकेलापन बढ़ता है, विशेषकर तब जब आसपास के लोग शादीशुदा हों। बीमारी के समय देखभाल करने वाले लोगों की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।
सामाजिक दबाव:
समाज द्वारा विवाह के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है, जिससे व्यक्ति स्वयं को अलग-थलग महसूस करने लगता है।
रिश्तों की चिंता:
माता-पिता के न रहने पर जीवनसाथी के अभाव की चिंता बढ़ जाती है। उम्र बढ़ने के साथ मित्रों और रिश्तेदारों से संपर्क भी कम हो जाता है।
आत्म-सम्मान में कमी:
लगातार दबाव और अकेलापन आत्म-सम्मान को कमजोर करता है, जिससे नकारात्मकता बढ़ती है।
अवसाद:
लंबे समय तक निराशा और अकेलेपन की भावना अवसाद का कारण बनती है। समय पर इलाज न होने पर आत्मघाती विचार भी उत्पन्न हो सकते हैं।
बचाव एवं समाधान:
• मजबूत सामाजिक नेटवर्क बनाएं
• रुचिकर शौक विकसित करें
• व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें
• नियमित व्यायाम, योग और ध्यान करें
• सकारात्मक सोच बनाए रखें
• अविवाहित रहने या विवाह करने का स्पष्ट निर्णय लें
• आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें
• समान अनुभव वाले समूहों से जुड़ें
• गंभीर मानसिक समस्याओं की स्थिति में विवाह पर गंभीरता से विचार करें
