मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:
हाल ही में नेशनल काउंसिल फॉर प्रोमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (एनसीपीयूएल), नई दिल्ली के सेवानिवृत्त अधिकारी, देश के प्रख्यात साहित्यकार एवं वरिष्ठ लेखक नदीम ग़ोरी ने महाराष्ट्र के बीड़ शहर में महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी, मुंबई के अध्यक्ष सैयद हसीन अख़्तर से विशेष भेंट की। यह मुलाक़ात अत्यंत सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
इस अवसर पर अकादमी अध्यक्ष सैयद हसीन अख़्तर ने नदीम ग़ोरी का हार्दिक स्वागत एवं आत्मीय अभिनंदन किया।
भेंट के दौरान उर्दू भाषा और साहित्य के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उल्लेखनीय है कि नदीम ग़ोरी की साहित्यिक रचनाएँ देश और विदेश में प्रकाशित होने वाली विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं, जर्नलों एवं मैगज़ीनों में निरंतर प्रमुखता से प्रकाशित होती रही हैं। उनका लेखन न केवल उर्दू साहित्य के पाठकों को वैचारिक रूप से प्रभावित करता है, बल्कि उन्हें भीतर तक झकझोर देने की क्षमता भी रखता है।
नदीम ग़ोरी ने नेशनल काउंसिल फॉर प्रोमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (एनसीपीयूएल), नई दिल्ली में उच्च पदों पर रहते हुए महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान की हैं। उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय माना जाता है। उनकी नवीन कृति “तैफ़-ए-अदब” शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही है, जिसका साहित्यिक जगत में बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है।
महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सैयद हसीन अख़्तर से हुई इस भेंट के दौरान दोनों विद्वानों ने महाराष्ट्र में उर्दू भाषा और साहित्य के संवर्धन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया। नदीम ग़ोरी द्वारा उठाई गई शंकाओं और चिंताओं पर सैयद हसीन अख़्तर ने अत्यंत संतोषजनक, दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी उत्तर प्रदान किए।
इसके अतिरिक्त राज्य में उर्दू से संबंधित साहित्यिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने, नए लेखकों और पाठकों को साहित्यिक मंच उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
उर्दू भाषा और साहित्य से जुड़े क्षेत्र में दोनों विद्वानों की यह भेंट अत्यंत सकारात्मक, उद्देश्यपूर्ण एवं साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आशा व्यक्त की जा रही है कि इस मुलाक़ात के दूरगामी और सकारात्मक परिणाम सामने आएँगे।
