सद्दाम हुसैन, ब्यूरो चीफ, लखनऊ (यूपी), NIT:
कभी कानून-व्यवस्था का प्रतीक रहा एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) का आवास आज स्वयं सवालों के घेरे में आ गया है। राजधानी के मोहनलालगंज तहसील परिसर में स्थित यह सरकारी भवन अब अपनी पहचान खोकर एक जर्जर खंडहर में तब्दील हो चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह खंडहर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के आवास से सटा हुआ है और आसपास पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहता है। इसके बावजूद यहां अराजक गतिविधियां खुलेआम पनप रही हैं।
दिन के उजाले में यह खंडहर अवैध पार्किंग का अड्डा बना हुआ है। बिना किसी अनुमति, पर्ची या जवाबदेही के वाहन यहां खड़े किए जाते हैं। लेकिन असली खतरा रात ढलते ही शुरू होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही यहां नशेबाजों और संदिग्ध तत्वों की आवाजाही बढ़ जाती है। खंडहर की आड़ में क्या-क्या गतिविधियां होती हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह सब उस इलाके में हो रहा है, जिसे वीआईपी और अति-सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस अधिकारी का पूर्व आवास ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करे?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस खंडहर को सील कर उचित घेराबंदी नहीं की गई या इसे ध्वस्त नहीं किया गया, तो यह भविष्य में किसी बड़ी आपराधिक वारदात का कारण बन सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस ‘अंधेरे के अड्डे’ पर कब तक आंखें मूंदे रहता है, या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा।
