अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

प्रदेशव्यापी आह्वान पर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (संबद्ध ऐक्टू) के बैनर तले आशा कर्मियों ने बालसन चौराहा से मंडल आयुक्त कार्यालय तक मार्च निकालकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मंडल आयुक्त को सौंपा।

मार्च के दौरान आशा कर्मियों ने “15 दिसंबर से जारी हड़ताल, वार्ता करे योगी सरकार”, “आज करो अर्जेंट, करो हमको परमानेंट”, “आशाओं का अपमान करने वाले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य माफी मांगो”, “आशा व आशा संगिनी को राज्य कर्मचारी का दर्जा दो”, “2000 में दम नहीं, 21000 से कम नहीं” जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऐक्टू के प्रदेश सचिव कॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि 15 दिसंबर 2025 से उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर प्रदेश भर की आशा कर्मी अपनी वर्षों से लंबित मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उसकी नौकरशाही और सरकार द्वारा लंबे समय से मांगों की अनदेखी किए जाने के कारण यह हड़ताल मजबूरी में करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को शासन ने औपचारिक बातचीत कर मांगों पर विचार और त्वरित वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके विपरीत आशा कर्मियों को डराने, धमकाने, अपमानित करने और उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही हैं। कई स्थानों पर पुरुष अधिकारियों द्वारा अमर्यादित व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं।
प्रयागराज मंडल अध्यक्ष रेखा मौर्य ने कहा कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से सभी आशा कर्मी स्वयं को अपमानित महसूस कर रही हैं। इस बयान से हड़ताली आशा कर्मियों सहित प्रदेश की कामकाजी महिलाओं में भारी रोष व्याप्त है।
जिला सचिव मंजू ने कहा कि सरकार की अनदेखी, जारी उत्पीड़न और उपमुख्यमंत्री के अभद्र बयान के खिलाफ आशा कर्मी संघर्षरत हैं। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज करते हुए पुनः विधानसभा घेराव किया जाएगा।
ऐक्टू जिला सचिव कॉ. देवानंद ने सरकार द्वारा लाए गए चार मजदूर विरोधी श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि आशा और आशा संगिनी वर्षों से घोषित प्रोत्साहन राशियों से वंचित हैं। वर्ष 2019 से लंबित भुगतानों को लेकर आशा कर्मी लगातार लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी बनाने में आशा और संगिनी के वर्षों के योगदान के बावजूद लगभग ₹225 करोड़ की प्रोत्साहन राशि अब तक नहीं दी गई है।
आशा कर्मियों ने वर्ष 2025 के कई माह से लंबित आधार प्रोत्साहन राशि, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति और अन्य अभियानों के बकाया भुगतान तत्काल किए जाने की मांग की। साथ ही आशा व आशा संगिनी को मानदेय स्वयंसेवक के बजाय 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन लागू करने, ईपीएफ-ईएसआई, ग्रेच्युटी, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा देने की मांग की।
इसके अलावा न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को ₹21,000 तथा आशा संगिनी को ₹28,000 मानदेय देने, भ्रमण भत्ता या आवागमन के लिए स्कूटी उपलब्ध कराने सहित 15 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन में मंडल के विभिन्न जिलों से आई आशा नेताओं के साथ आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार, भानु, शशांक, आरवाईए प्रदेश उपाध्यक्ष राधा, भाकपा माले जिला प्रभारी कॉ. सुनील मौर्य ने भी संबोधित किया।
प्रदर्शन में आशा सिंह (कौशाम्बी), कान्ती, सरिता सिंह, संगीता, रंजना, सरोज कुशवाहा, रीना, बसंती, कलावती, अंजू शर्मा, लालिमा, अनीता यादव सहित सैकड़ों आशा वर्कर्स शामिल रहीं।
