नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

एंटी करप्शन ब्यूरो ने चार हजार की रिश्वत लेने के मामले में एक नौजवान पटवारी को रंगेहाथ पकड़ा है। जलगांव जिले के जामनेर का यह किस्सा जनता के बीच कोई खास सनसनी पैदा करने मे असफल रहा। प्रॉपर्टी के व्यवहार को नामजद कराने के लिए घुस मांगने वाला 27 साल का पटवारी वसीम राजु तड़वी पुलिस हिरासत में है।
रिश्वत के ख़िलाफ़ काम करने वाले पुलिस महकमे के प्रमुख हेमंत नागरे की शिकायत पर तड़वी के ख़िलाफ़ फौजदारी दर्ज करवाई गई। कहानी कुछ ऐसी है कि 16 दिसंबर 2025 को जामनेर राजस्व क्षेत्र में लेनदार ने दो निवासी भूखंड खरीदे। लेनदेन के व्यवहार का उलटफेर 21 दिन के भीतर सरकारी दस्तावेज में प्रमाणित करना होता है। आम तौर पर पटवारी अपनी ऊपरी कमाई के लिए समय सीमा का पालन नहीं करते हैं।
लंबित उलटफेर प्रकरणों को लेकर तीन दिन पहले जिलाधीश ने संबंधित कर्मचारी अधिकारियों को जमकर लताड़ते हुए काम-काज को निपटाने के लिए प्रशासन को नया प्रोग्राम दिया है। जामनेर की केस के संदर्भ से बताना ज़रूरी हो जाता है कि महाराष्ट्र में जमीन व्यवहारों से जुड़ा दूसरा अप्रत्यक्ष पहलू अपंजीकृत कमीशन एजेंट्स भी है जिनको आम लोग दलाल के नाम से पहचानते हैं।
ये ब्रोकर अपने कमीशन के लिए एक हि प्रॉपर्टी का व्यवहार कई लेनदेनदारों से करते रहते हैं इस चक्र को चलाने के लिए संबंधित पटवारियों को समय समय पर जेब खर्च देकर खुश किया जाता रहता है। निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकारी दस्तावेजों में मुकम्मल उलटफेर के अभाव के कारण आर्थिक धोखाधड़ी के मामले बढ़ते है। इस सिस्टम मे ब्रोकर और राजस्व के कर्मचारी बराबर के दोषी है वही प्रार्थी अपनी विवशता के चलते सहभागी हो जाता है।
