शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक आवश्यक बैठक देर सायं कलबंती शुभारंभ मैरिज लॉन, तारामंडल रोड, रामपुर चौराहा पर संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया।
बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार कॉरपोरेट घरानों के दबाव में कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। धीरे-धीरे सभी विभागों का निजीकरण कर उन्हें कॉरपोरेट के हाथों सौंपने की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी शेयर-आधारित पेंशन व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि वे अपने भविष्य के साथ जोखिम नहीं लेना चाहते। कर्मचारी सुरक्षित भविष्य की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 97 प्रतिशत कर्मचारियों ने एकीकृत पेंशन योजना (UPS) का विकल्प नहीं चुना है, जो इस व्यवस्था के प्रति कर्मचारियों के अविश्वास को दर्शाता है। परिषद ने सरकार से मांग की कि एनपीएस और यूपीएस दोनों को समाप्त कर शीघ्र पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल की जाए।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आठवां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय में सरकार को सौंपे। जब तक रिपोर्ट लागू नहीं होती, 1 जनवरी 2026 से वेतन में अंतरिम राहत दी जानी चाहिए, ताकि कर्मचारी और उनका परिवार सम्मानजनक जीवन यापन कर सके। साथ ही 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को मूल वेतन में जोड़े जाने, पेंशनरों को वेतन आयोग से समुचित लाभ देने, कोरोना काल में फ्रीज किए गए 18 माह के डीए/डीआर एरियर के भुगतान तथा 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पर पेंशन में 20 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ोतरी की मांग की गई। पेंशनरों के लिए रेलवे किराया रियायत बहाल करने की भी मांग उठाई गई।
महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि पुरानी पेंशन के बिना कर्मचारियों, शिक्षकों, पुलिस जवानों और अर्धसैनिक बलों का भविष्य अंधकारमय है। जब व्यवस्थापिका को पुरानी पेंशन मिल रही है, तो कार्यपालिका में एनपीएस और यूपीएस क्यों लागू किए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि यदि माननीयों की कई-कई पेंशन समाप्त कर सभी के लिए एक समान पेंशन व्यवस्था लागू कर दी जाए, तो देश अधिक खुशहाल हो सकता है।
अपने संबोधन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित श्याम नारायण शुक्ल ने कहा कि फिटमेंट फैक्टर 3.86 से कम नहीं किया जाना चाहिए। महंगाई लगातार बढ़ रही है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा घरेलू खर्च का बोझ कर्मचारियों पर बढ़ता जा रहा है, ऐसे में सरकार को संवेदनशील निर्णय लेना चाहिए।
बैठक में रूपेश श्रीवास्तव, गोविंद जी, मदन मुरारी शुक्ल, पंडित श्याम नारायण शुक्ल, अनिल द्विवेदी, बंटी श्रीवास्तव, मिथिलेश तिवारी, राजेश मिश्रा, राजेश सिंह, संतोष सिंह सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
