“जिसने हमें वचन दिया है, वह सत्यप्रतिज्ञ है” — जुबिली वर्ष 2025 में क्रिसमस का आशा-भरा संदेश | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

“जिसने हमें वचन दिया है, वह सत्यप्रतिज्ञ है” — जुबिली वर्ष 2025 में क्रिसमस का आशा-भरा संदेश | New India Times

जुबिली वर्ष 2025 – “आशा के तीर्थयात्री” के इस अनुग्रहपूर्ण समय में, प्रभु येसु मसीह के जन्मोत्सव के अवसर पर मैं आप सभी को हृदय की गहराइयों से हार्दिक शुभकामनाएँ और आशीर्वाद प्रेषित करता हूँ।

क्रिसमस वह पावन घड़ी है जब हम यह विश्वास करते हैं कि ईश्वर ने मानव रूप धारण कर हमारे बीच निवास किया। प्रभु येसु का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के असीम प्रेम, करुणा और विश्वासयोग्यता का जीवंत प्रमाण है। “जिसने हमें वचन दिया है, वह सत्यप्रतिज्ञ है”—यह वचन जुबिली वर्ष में हमें विशेष रूप से यह आश्वासन देता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, ईश्वर मानवता को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

जुबिली वर्ष में मनाया जा रहा यह क्रिसमस हमें आत्मिक नवीकरण और विश्वास की नई यात्रा के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें बुलाता है कि हम अपने हृदयों के द्वार प्रभु के लिए खोलें और अपने जीवन में उनके प्रेम को कार्यरूप दें। प्रभु का शरीरधारण यह सिखाता है कि हर मानव जीवन मूल्यवान है, चाहे वह गरीब हो या धनी, शक्तिशाली हो या निर्बल। इसलिए यह पर्व हमें सम्मान, समानता और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

क्रिसमस केवल दीपों, गीतों और उत्सवों तक सीमित नहीं है। यह हृदय के परिवर्तन का पर्व है। इस पावन अवसर पर मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि हम अपने जीवन से क्रोध, द्वेष, अहंकार, ईर्ष्या, असहिष्णुता, हिंसा, स्वार्थ और निराशा को दूर करें और उनके स्थान पर प्रेम, क्षमा, दया, विनम्रता, सेवा, सहनशीलता और भाईचारे को अपनाएँ। जब हमारे परिवारों में समझ और शांति होगी, जब हमारे पड़ोस में सहयोग और अपनापन होगा, तभी समाज में सच्चा क्रिसमस साकार होगा।

इस जुबिली वर्ष में हम विशेष रूप से उन भाइयों-बहनों को याद करें जो कम सुविधाओं, गरीबी, बीमारी और विभिन्न कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। प्रभु येसु स्वयं एक साधारण चरनी में जन्मे—यह हमें सिखाता है कि ईश्वर गरीबों और वंचितों के बहुत निकट है। हमारी प्रार्थना, हमारी सेवा और हमारी साझा की गई छोटी-सी खुशी भी उनके जीवन में आशा का दीपक जला सकती है।

हम सब मिलकर इस जुबिली वर्ष में सचमुच “आशा के तीर्थयात्री” बनें—ऐसे तीर्थयात्री जो निराश संसार में आशा, विभाजन में एकता और अंधकार में प्रकाश लेकर चलते हैं। हमारे शब्द, हमारे कार्य और हमारा जीवन स्वयं मसीह का साक्ष्य बनें। सभी को क्रिसमस एवं नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं।

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