शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:
मुख्यमंत्री के आदेशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। विभिन्न विभागों के अधिकारी चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों को कार्यालय में ही 1 से 2 महीने तक लंबित रख रहे हैं। इसके बाद बिल सीएमओ कार्यालय से वापस आने में और 3 महीने लग जाते हैं, जिसके कारण कुल मिलाकर 5 से 6 महीने तक भुगतान नहीं हो पाता। यह प्रक्रिया न केवल गलत है, बल्कि नियमों का गंभीर उल्लंघन भी है।
जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध किया गया है कि एक माह के भीतर जमा होने वाले चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
लोक निर्माण विभाग के आहरण-वितरण कार्यालय में दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस कार्ड की दर्जनों आवेदनों को भी महीनों से पेंडिंग रखा गया है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि इन कार्डों को शत-प्रतिशत बनवाया जाए, क्योंकि यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है।— मदन मुरारी
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव, मंत्री मदन मुरारी शुक्ल, अशोक पांडे, पं. श्याम नारायण शुक्ल, अनूप कुमार श्रीवास्तव, ई. सौरभ कुमार श्रीवास्तव, यशवीर श्रीवास्तव, इजहार अली, राजेश मिश्रा, बंटी श्रीवास्तव आदि ने संयुक्त प्रेस बयान में बताया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान में 6 महीनों की देरी के कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बीमारियों में समय पर इलाज न मिल पाने से गंभीर स्थिति जान का खतरा भी हो सकता है।
उन्होंने जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध किया कि सभी विभागों को आदेश जारी कर प्रतिपूर्ति बिलों की जमा से भुगतान तक की प्रक्रिया समयबद्ध की जाए, ताकि कोई कर्मचारी या पेंशनर उपचार से वंचित न रहे।
इसके साथ ही सभी विभागों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस कार्ड को शत-प्रतिशत जारी करने के निर्देश दिए जाएँ, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारी और उनका परिवार समय पर अपना इलाज कर सके। लोक निर्माण विभाग में दर्जनों लंबित आवेदनों का निस्तारण कराने की भी मांग की गई है।
जिलाधिकारी से यह भी अनुरोध किया गया है कि सभी अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि वे कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को कैशलेस कार्ड का पूरा लाभ प्रदान करें।
अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों से अपील है कि कैशलेस कार्ड धारकों का अस्पतालों में उचित ढंग से उपचार हो। अप्रूवल आने तक मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न की जाए—यह स्वयं मुख्यमंत्री का निर्देश है।
उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर को नगर निगम में प्रस्तावित पेंशनर्स के धरने में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स का समर्थन किया जाएगा तथा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
