मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
जलगाँव के प्रसिद्ध और सम्मानित धार्मिक विद्वान (आलिम-ए-दीन) जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष तथा देश के बेबाक व लोकप्रिय वक्ता एवं पत्रकार मुफ़्ती मोहम्मद हारून नदवी ने कहा कि “बच्चे अल्लाह की अनमोल नेअमत (वरदान) हैं। उनकी सही इस्लामी शिक्षा और ईमानदार परवरिश देना हर माता-पिता पर फर्ज़ (कर्तव्य) है। यदि बच्चों की दीन-धर्म के अनुसार परवरिश नहीं की गई, तो अल्लाह के यहां सख्त पूछ-ताछ होगी।”
मौसुफ मरकज़-ए-मकातिब बुरहानपुर द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में अपने प्रभावशाली संबोधन में बोल रहे थे।
इस्लामी शिक्षा — जीवन की पहली और सबसे अहम नींव
मुफ़्ती मोहम्मद हारून नदवी ने कहा कि बच्चों को संसार के विज्ञान, तकनीक और आधुनिक कौशल अवश्य सिखाएँ, परंतु सबसे पहले उन्हें दीन-धर्म की बुनियादी शिक्षा देना और उनके ईमान की रक्षा करना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—
> “यदि आप बच्चों को मकतब और मदरसे से दूर रखेंगे, तो याद रखिए कि आज ईमान लूटने वाली ताक़तें आपके घरों तक पहुँच चुकी हैं। संभव है कि आपको पता भी न चले और आपके बच्चे आपके हाथों से निकल चुके हों।”
उन्होंने कहा कि मकतब और मदरसे “दीन और ईमान की सुरक्षा के मजबूत किले” हैं, इसलिए हर मुस्लिम परिवार को चाहिए कि अपने बच्चों को सबसे पहले इन संस्थानों से जोड़े।
मरकज़-ए-मकातिब — पाँच वर्षों से दीन की मज़बूती का सशक्त माध्यम
आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों से मरकज़-ए-मकातिब, बुरहानपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दीन-धर्म की प्राथमिक शिक्षा को मजबूत और व्यवस्थित बनाने का कार्य कर रहा है। संस्था मरकज़ ए मकातिब (धार्मिक प्राथमिक शिक्षालयों का समूह/केंद्र) को बेहतर प्रणाली प्रदान करने,बच्चों में धार्मिक उत्साह और लगाव पैदा करने,तथा उन्हें श्रेष्ठ पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करने जैसे धार्मिक कार्यों में निरंतर सक्रिय है।
मरकज़ ए मकातिब की उत्कृष्ट सेवा से प्रभावित होकर मुफ़्ती हारून नदवी ने संस्था के जिम्मेदारों को दुआएँ (आशीर्वाद) से नवाज़ा और जनता से इस संस्था(मरकज़ ए मकातिब) की हर संभव सहायता करने की अपील की।
उत्कृष्ट छात्रों को कीमती पुरस्कार — शीर्ष पाँच को साइकिलें
कार्यक्रम में सफल छात्रों को विशेष सम्मान और आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए।शीर्ष पाँच छात्रों को नई साइकिलें भेंट की गईं। द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को भी महत्त्वपूर्ण उपहार और प्रमाण-पत्र दिए गए। उनके उस्तादों (शिक्षकों) को भी सराहना-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विभिन्न मदरसों (इस्लामी शिक्षालयों) के उलेमा-ए-दीन (धार्मिक विद्वानों)और शिक्षकों की बड़ी उपस्थिति
कार्यक्रम में लगभग 28 मकातिब (मदरसों) के शिक्षकों, उलेमा-ए-दीन (धार्मिक विद्वानों) और शहर की कई महत्वपूर्ण हस्तियों ने भाग लिया। आयोजक संस्थाओं की ओर से हज़रत मौलाना इसरार नदवी ने मरकज़-ए-मकातिब के उद्देश्यों, कार्यों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुफ़्ती हारून नदवी का भाषण सुनने के लिए शहर के सैकड़ों अभिभावक और नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन मुफ़्ती मोहम्मद हारून नदवी की भावपूर्ण दुआ (प्रार्थना) पर हुआ। मंच पर शहर के प्रमुख विद्वान और सामाजिक व्यक्ति मौजूद रहे, जिनमें:
मौलाना इसरार नदवी
मौलाना अब्दुर्रहमान अशरफ़ी
मौलाना अतीक अशआती (इमाम व ख़तीब, मस्जिद ताना गजरी, अंडा बाज़ार)
अलहाज नूरुद्दीन क़ाज़ी (प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्ती) तथा मरकज़-ए-मकातिब की पूरी टीम शामिल रही।
