मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
कभी-कभी ज़िंदगी और मौत के बीच बस एक टीम का समर्पण खड़ा होता है — ऐसी ही मिसाल पेश की है जिला अस्पताल छिन्दवाड़ा और बीएमओ जमाई की चिकित्सा टीम ने। इनके संयुक्त प्रयासों और संवेदनशीलता से एक गंभीर गर्भवती महिला को जहां नया जीवन मिला, वहीं गोद में स्वस्थ संतान का सुख भी प्राप्त हुआ।
जुन्नारदेव के ग्राम बिछुआ चरणभाटा निवासी 30 वर्षीय गर्भवती श्रीमती सुमरती भारती, पति रामलाल भारती को 22 अगस्त 2025 को गंभीर एनीमिया और लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में सीएचसी जुन्नारदेव से जिला अस्पताल छिन्दवाड़ा रेफर किया गया। उस कठिन घड़ी में महिला के साथ कोई परिजन नहीं था और न ही कोई पहचान पत्र उपलब्ध था।
लेकिन चिकित्सकों ने मानवीयता को सर्वोपरि रखते हुए बिना समय गंवाए उपचार प्रारंभ किया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीएमओ जुन्नारदेव डॉ. सुरेश नागवंशी ने तत्काल डीएचओ को सूचना दी, जिन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञों को अलर्ट किया। जांच में पाया गया कि सुमरती हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस हैं और पूर्व में उनकी कोई भी जीवित संतान नहीं थी। साथ ही हृदय संबंधी बीमारी के कारण हर क्षण चुनौतीपूर्ण था। 4 अक्टूबर को स्थिति और बिगड़ी — उस दिन सुमरती का ब्लड प्रेशर 85/52 और पल्स 52 तक गिर गई। तुरंत आईवी फ्लूड लगाया गया और नॉरएड्रेनालिन इंजेक्शन से स्थिति नियंत्रित की गई।
डॉक्टरों द्वारा सतत मॉनिटरिंग जारी रही और रोज़ाना सीएमएचओ व डीएचओ को रिपोर्ट भेजी जाती रही।
यह मामला अब केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि मानवता की परीक्षा बन चुका था। उसी दिन गायनेकोलॉजिस्ट द्वारा किए गए अल्ट्रासाउंड में 35 सप्ताह का गर्भ पाया गया। सिविल सर्जन व आरएमओ के प्रयासों से 2डी ईको जांच भी कराई गई, ताकि मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
16 अक्टूबर को स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ — टीम के अथक प्रयासों का परिणाम रहा कि 16 अक्टूबर को दोपहर 12:14 बजे जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थियेटर में स्त्री रोग विशेषज्ञों, एनेस्थीसिया टीम और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की देखरेख में महिला का सफल सिजेरियन हुआ।
सुमरती ने जैसे ही 3.2 किलोग्राम की एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, पूरे ऑपरेशन थियेटर में नई जिंदगी की मुस्कान छा गई।
प्रसव के बाद महिला को ऑब्जर्वेशन यूनिट में विशेष निगरानी में रखा गया। लगातार चिकित्सा देखरेख, नर्सिंग स्टाफ की सेवा भावना और टीम की संवेदनशीलता ने चमत्कार कर दिखाया। कुछ ही दिनों में उनका हीमोग्लोबिन स्तर 8.8 ग्राम तक पहुँच गया और 20 अक्टूबर को उन्हें पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में स्थानांतरित किया गया। अंततः 108 एम्बुलेंस से सुमरती को उनकी स्वस्थ नन्ही बच्ची के साथ सुरक्षित घर भेजा गया।
यह सफलता चिकित्सा कर्मियों के समर्पण, तत्परता और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहां एक ओर परिस्थितियाँ निराशाजनक थीं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्यकर्मियों की निष्ठा और संवेदनशीलता ने यह सिद्ध कर दिया कि —
“जब इरादे नेक हों, तो ईश्वर स्वयं इंसानों के हाथों से चमत्कार करवाते हैं।”
