वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल के केंद्रीय सचिव आकाश नारायण अवस्थी ने काशी में यतिचक्रचूड़ामणि, परमाराध्य, परमधर्माधीश, सनातन धर्म प्रतिपालक, गौ संरक्षणकर्ता, भगवत्पाद जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित श्री श्री स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के दिव्य दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए।
इस अवसर पर श्री अवस्थी ने शंकराचार्य जी से गोला गोकर्णनाथ (ज्योतिर्मठ क्षेत्र) पधारने हेतु विनम्र निवेदन किया, जिसे भगवन् ने सानंद स्वीकार किया। साथ ही उन्होंने गोला गोकर्णनाथ में गौधाम स्थापना का आदेश तथा आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल के कार्यों को और अधिक गतिशील करने के निर्देश प्रदान किए।
इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के मीडिया प्रभारी डॉ. योगी जी भी उपस्थित रहे। भगवन् का दिव्यागमन आगामी वर्ष के प्रारंभिक महीनों में प्रस्तावित है, जो “गौ संकल्प अभियान” के अंतर्गत संपन्न होगा। इस आयोजन से संबंधित विस्तृत जानकारी शीघ्र ही सार्वजनिक की जाएगी।
वर्तमान में शंकराचार्य जी सम्पूर्ण भारत में “गौमाता राष्ट्रमाता अभियान” के माध्यम से धर्म जागरण का कार्य कर रहे हैं। बिहार राज्य में यह अभियान पूर्ण होने के उपरांत इसका शुभारंभ उत्तर प्रदेश से किया जाएगा, जिसके अंतर्गत शंकराचार्य जी विभिन्न जनपदों में गौ एवं धर्म सभाओं में सम्मिलित होंगे।
ज्ञातव्य है कि लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान शिव ने आदि शंकराचार्य रूप में अवतार लेकर ईसा पूर्व चार दिशाओं में चार प्रमुख मठों — पूर्व में पुरी गोवर्धन मठ, पश्चिम में द्वारका शारदा मठ, उत्तर में ज्योतिर्मठ, और दक्षिण में श्रृंगेरी मठ — की स्थापना की थी, जो चारों वेदों को समर्पित हैं।
शंकराचार्य का पद कलियुग में सनातन धर्म की सर्वोच्च सत्ता माना जाता है। सार्वभौम जगद्गुरु के रूप में उनकी सत्ता विराजित है। वे भगवान शिव के स्वरूप हैं और देवराज इंद्र की भाँति चंवर, छत्र एवं सिंहासन से अलंकृत होते हैं।
जनपद खीरी ज्योतिर्मठ क्षेत्र के अंतर्गत आता है। गोला गोकर्णनाथ में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आयोजन की आधिकारिक घोषणा शीघ्र ही ज्योतिर्मठ कार्यालय द्वारा की जाएगी।
इस आयोजन को आचार्य शंकर भारत उद्भासक मंडल के केंद्रीय सचिव आकाश नारायण अवस्थी एवं सचिव इं. मिलिंद कुमार शुक्ल द्वारा साकार किया जाएगा। इसमें मंडल के पदाधिकारी, वेदवेत्ता, शास्त्रीय एवं संस्कृत विद्वान, गणमान्य नागरिक तथा हिन्दू धर्मावलंबियों की विशाल उपस्थिति रहेगी।
