शहर में धडल्ले से इस्तेमाल हुआ चायनीज मांजा, माफियाओं की खूब कमाई, प्रशासन की आंखे बंद | New India Times

ओवैस सिद्दीकी, अकोला (महाराष्ट्र), NIT; ​शहर में धडल्ले से इस्तेमाल हुआ चायनीज मांजा, माफियाओं की खूब कमाई, प्रशासन की आंखे बंद | New India Timesमकरसंक्रांती के चलते शहर में विविध समाज के नागरिकों ने पतंग उडाने का लुतफ उठाया, साथ ही स्थनिय जिलाधिकारी एवं जिला पुलीस अधीक्षक भी पतंग उडाने में मगन नजर आए। ​शहर में धडल्ले से इस्तेमाल हुआ चायनीज मांजा, माफियाओं की खूब कमाई, प्रशासन की आंखे बंद | New India Timesशहर एवं तहसील स्तर पर बडे पैमाणे पर चायनीज मांजे की खरीदो फरोखत होने की जानकारी सामने आई है। प्रतिबंध होने के बावजुद शहर में माफियाओं द्वारा पुलिस के नाक के नीचे लाखों रुपय का प्रतिबंधित मांजा बेचा गया। ज्ञात रहे कि चायनीज मांजा पशु, बच्चों आदि को गंभीर रूप से घायल कर सक्ता है, लेकीन इस संदर्भ मे पुलिस प्रशासन द्वारा कोई ठोस कारवाई नहीं की गई तथा हुई भी तो इतमीनान बखश नहीं। शहर में हर जगह चायनीज मांजे का उपयोग नजर आया। ​शहर में धडल्ले से इस्तेमाल हुआ चायनीज मांजा, माफियाओं की खूब कमाई, प्रशासन की आंखे बंद | New India Timesप्रतिबंध होने की वजह से दुकानदारों द्वारा दोगुने दामों में लाखों रुपय का चायनीज मांजा बेचे जाने की गंभीर खबर सामने आई है। इस संदर्भ में पुलिस प्रशासन को कोई जानकारी क्यों प्राप्त नही हुई? आखीर क्यों इन माफियाओं पर महेरबानी? पुरे शहर में तस्करी किए जाने पर भी पुलिस को कानों कान खबर नहीं हुई। खुशकिस्मती से शहर में इसकी वजह से कोई अनुचित घटना सामने नहीं आई। क्या प्रशासन को कोई बडी घटना का इंतेजार था? आखिर कहाँ पुलिस प्रशासन कमजोर पडा? शहर में कडा पुलिस बंदोबस्त होने के बाद भी माफिया कामयाब नजर आए तथा दोगुने दामों में प्रतिबंधित मांजा बेच सक्रिय होने की जानकारी सूत्रों द्वारा प्राप्त हुई है। दूसरी ओर जिलाधिकारी एवं जिला पुलिस अधीक्षक भी पतंग उडाने में मगन नजर आए। कहीं इनके द्वारा इस्तेमाल किया गया मांजा चायनीज ही तो नहीं था? ऐसे अनेकों सवाल नागरिकों द्वारा किए जा रहे हैं।

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