भाजपा नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

भाजपा के नगर पंचायत अध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जांच की मांग उठी है।जी हाँ, यह वही नगर पंचायत अज़राफपुर किछौछा के अध्यक्ष ओमकार गुप्ता हैं, जिन्होंने जीत के बाद नारा दिया था — “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” — लेकिन आरोप है कि जीत के बाद नेताजी ने खूब संपत्तियाँ अर्जित कीं, जिससे अब वे आयकर विभाग की नजरों में आ गए हैं।

ओमकार गुप्ता पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में एक शिकायत आयकर विभाग (इन्वेस्टिगेशन विंग), लखनऊ में दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि अध्यक्ष पद संभालने के बाद ओमकार गुप्ता ने अपने, परिजनों और नज़दीकी सहयोगियों के नाम पर कई संपत्तियाँ खरीदी हैं, जिनका बाजार मूल्य उनकी घोषित आय से कहीं अधिक है।

शिकायत पत्र के अनुसार खरीदी गई संपत्तियाँ इस प्रकार हैं:ओमकार गुप्ता (स्वयं):भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹11,42,000 / क्रय मूल्य ₹4,55,000 (10 नवम्बर 2023)भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹17,86,000 / क्रय मूल्य ₹8,00,000 (7 सितम्बर 2024)भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹17,86,000 / क्रय मूल्य ₹6,00,000 (18 सितम्बर 2024)हरीओम गुप्ता (भाई):एफएमआईडी ₹20,00,000 (31 मई 2025)हरीश गुप्ता (भाई):भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹14,75,000 / क्रय मूल्य ₹14,00,000 (19 फरवरी 2025)विनोद गुप्ता (रिश्तेदार):भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹59,85,000 / क्रय मूल्य ₹12,00,000 (21 मई 2025)राजेश कुमार (मित्र):एफएमआईडी ₹3,00,000 (19 जनवरी 2024)भूमि क्रय — बाजार मूल्य ₹19,73,000 / क्रय मूल्य ₹7,50,000 (31 अगस्त 2024)शिकायत में कहा गया है कि इन संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य लाखों रुपये में है, जबकि गुप्ता परिवार की वैध आय इतनी संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देती।

यह भी आरोप है कि कुछ संपत्तियाँ बेनामी रूप में खरीदी गई हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 132 व 133A तथा बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 के अंतर्गत जांच कर संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाए और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाए। फिलहाल, मामले की जांच आयकर विभाग के इन्वेस्टिगेशन विंग, लखनऊ द्वारा की जाने की संभावना है। यदि आरोप सही पाए गए, तो नगर पंचायत अध्यक्ष पर गंभीर आर्थिक कार्रवाई की जा सकती है।

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