सबूतों के अभाव में एनडीपीएस एक्ट के तीनों आरोपी बरी, विशेष न्यायाधीश जिरेती साहब का फैसला | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

सबूतों के अभाव में एनडीपीएस एक्ट के तीनों आरोपी बरी, विशेष न्यायाधीश जिरेती साहब का फैसला | New India Times

मादक पदार्थों और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए NDPS ACT 1985 बनाया गया है। जिसे विस्तार में”नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेन्सेज़ एक्ट” कहा जाता है।इस क़ानून में अपराधियों पर कठोर दंड प्रावधानित है। पुलिस के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वह राई का पहाड़ की कहावत को चरितार्थ करते हुए अक्सर फ़र्ज़ी केसेस बनती है। बुरहानपुर के थाना लालबाग क्षेत्र में भी लालबाग पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 में आरोपी ज़ाहिर, मयूर और किरण के ख़िलाफ़ अपराध क्रमांक 568/ 21 दर्ज किया था। वकीलों के बारे में मशहूर है कि पुलिस कितने भी ताले लगा दे, चाबी कहीं भी फेंक दे,लेकिन वकील भी कानून की चाबी से उन तालों को खोलने की कला में माहिर होते हैं।

और जहां पर्दे के पीछे वरिष्ठ अधिवक्ता उबैद शेख की भूमिका हो तो वहां नाम ही काफ़ी होता है। मोहद मामले में एडवोकेट उबैद शेख ने शाहपुर के तत्कालीन टीआई द्वारा मुस्लिम समाज के लोगों के विरुद्ध रची गई साज़िश को बहुत बेबाकी और बे खौफ़ी से क़ानून का सहारा ले कर बे नक़ाब करते हुए आरोपियों को देशद्रोह के आरोप से बरी कराया था। अब इन्हीं के मार्गदर्शन और निगरानी में इन के भतीजे और एडवोकेट शोएब अहमद अधिवक्ता ने एनडीपीएस न्यायालय बुरहानपुर के विशेष न्यायाधीश माननीय जिरेती साहब के न्यायालय में आरोपी जहीर शाह की ओर से सशक्त पैरवी के परिणाम स्वरूप विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी ज़ाहिर सहित तीनों आरोपियों बा इज़्ज़त बरी कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विशेष अपर सत्र न्यायाधीश महोदय एनडीपीएस एक्ट बुरहानपुर पीठासीन अधिकारी श्री निलेश कुमार जिरेती साहब ने लालबाग पुलिस द्वारा 2021 में 03 आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में की गई कार्रवाई को अपने न्यायालयीन आदेश दिनांक 26/09/2025 के अनुसार तीनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। इस मामले में प्रथम आरोपी ज़ाहिर शाह की ओर से अधिवक्ता शोएब अहमद ने पैरवी की थी। वहीं अन्य आरोपियों में मयूर और किरण की ओर से अधिवक्ता सैयद इमरान और अधिवक्ता रितेश दुबे ने पैरवी की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अपराध के संक्षिप्त तथ्य यह है कि थाना लाल बाग बुरहानपुर के उप निरीक्षक अजय सिंह चौहान को मुखबिर की सूचना मिली कि मुंबई महाराष्ट्र की ओर से तीन व्यक्ति स्विफ्ट डिजायर कार क्रमांक एम एच 05 डी के 3593 में मादक पदार्थ गांजा बुरहानपुर में किसी को देने के लिए लेकर आ रहे हैं। सूचना विश्वसनीय होने से रोज़ नामचा सानहा में दर्ज कर 8 10 पुलिस के जवानों को लेकर मौके पर गए। मुखबिर द्वारा बताए गए नंबर वाली कार आई जिसे हमराह पुलिस फोर्स की मदद से रोका और कार में बैठे लोगों को कार से नीचे उतारा और एनडीपीएस एक्ट के तहत धारा 50 का सूचना पत्र आरोपीगण को दिया गया। बाद में कार की तलाशी और आरोपीगणों की भी तलाशी ली गई, जिसमें आरोपीगणों के हाथ में रखी प्लास्टिक की पानी की थैली में से मादक पदार्थ जप्त होना पुलिस द्वारा बताया गया।

उक्त कार्रवाई में आरोपी जहीर शाह  के पास से 3 किलो गांजा, मयूर से 2 किलो, किरण से 2400 ग्राम गंजा जप्त किया। मौके पर कार्रवाई करने के बाद थाने जाकर जप्त किया माल, माल खाने में जमा करा कर एफ आई आर लिख कर उक्त अपराध अंतर्गत धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज करने के बाद अनुसंधान पूर्ण कर चालान विशेष सत्र न्यायाधीश महोदय, एनडीपीएस एक्ट बुरहानपुर के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया ।पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक बुरहानपुर के निर्देशानुसार उक्त अपराध को चिन्हित प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था। बता दें कि चिन्हित प्रकरण की श्रेणी में उन्ही प्रकरणों को रखा जाता है जो अति गंभीर प्रकृति के होते हैं। चिन्हित प्रकरणों में विशेष ध्यान और विशेष पैरवी शासन/अभियोजन पक्ष की ओर से करवाई जाती है। उक्त एनडीपीएस प्रकरण में शासन की ओर से लोक अभियोजक बुरहानपुर कैलाश नाथ गौतम डीपीओ के द्वारा की जा रही थी।

न्यायालय द्वारा विचारण के दौरान आरोप पत्र निर्मित किए गए और प्रकरण में 13 साक्षीगण के कथन अंकित किए गए। न्यायालय में साक्षियों का प्रति परीक्षण/बचाव पक्ष रखते हुए आरोपी जहीर शाह की ओर से पैरवी कर रहे उसके विद्वान अधिवक्ता शोएब अहमद पिता इकबाल मुबीन के द्वारा किया गया।बाद विचारण के न्यायालय द्वारा प्रकरण में आई साक्ष्य का बारी की और सूक्ष्मता से अवलोकन  के बाद न्यायालय द्वारा साक्षियों के कथनों में आए विरोधाभास और प्रकरण में जांच अधिकारी के द्वारा की गई प्रक्रिया में अनियमितता के आधार पर दि. 26.9.2025 को फैसला सुनाया गया। न्यायालय द्वारा पारित निर्णय में कहा गया कि अभियोजन के द्वारा अपनी पूर्ण कार्रवाई मुखबिर सूचना से लेकर अनुसंधान के अंत तक अपना मामला प्रमाणित करने में असफल रहा है। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्षी में सबूत, विरोधाभास एवं संदेहास्पद विसंगतियां होने से अभियोजन पक्ष अभियुक्त गण के विरुद्ध आरोपित मामला साबित करने में असफल रहा है। न्यायालय द्वारा आरोपी जहीर शाह, किरण और मयूर को उन पर लगे धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के आरोप से दोष मुक्त कर उन्हें बा इज़्ज़त बारी कर दिया गया है।

अधिवक्ता शोएब अहमद के द्वारा बताया गया कि एनडीपीएस कानून के तहत कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को सही प्रक्रिया का अनुसरण करना आवश्यक होता है। प्रक्रिया में माल को जप्त करना, तौलना, सैंपल लेना, माल को जप्त करना, सील बंद करना और जांच के लिए भेजना, यह सभी कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बड़ी सावधानी पूर्वक करना चाहिए। अधिवक्ता शोएब अहमद के अनुसार उक्त प्रकरण में जांच अधिकारी के द्वारा कार्यवाहियों का अनुसरण अधिनियम के तहत नहीं किया गया था। उक्त प्रकरण में लिए गए गांजे के सैंपल में से कुछ नमूने पुलिस के द्वारा न्यायालय में प्रस्तुति नहीं किए गए थे, जोकि गंभीर त्रुटि होकर प्रकरण पर संदेह उत्पन्न करती है और अभियोजन पक्ष की इसी प्रकार की अनेक गलतियों का लाभ विद्वान न्यायाधीश महोदय द्वारा आरोपी गणों को दिया जाकर आरोपी गणों को न्याय प्रदान किया जा कर उन्हें दोषमुक्त किया गया है।

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