नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
16 सितंबर की भोर जलगांव जिले के अलग अलग ब्लॉक में भारी बारिश ने SDRF को दस्तक देने पर मजबूर कर दिया। लगातार सात घंटो तक चली मूसलाधार बारिश के कारण वाघूर डैम के 12 दरवाज़े खोलने पड़े हैं। जामनेर के नेरी में 40/50 घरों मे पानी घुसकर गरीबों का गृह उपयोगी सामान बह गया। तीन मवेशी मारे गए कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया। ब्लॉक राजस्व प्रमुख नानासाहब आगले ने भरी बारिश में आपदा प्रबंधन के सिस्टम को फौरी तौर पर काम पर लगाया। दूसरे दिन सुबह राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ब्लॉक में दस्तक दी। जलजमाव, बाढ़ के ठिकानों को चिन्हित किया गया। पूरे जलगांव जिले में 300 मिमि बारिश रिकॉर्ड की गई।

इस बार जिला प्रशासन की तैयारियां पुख्ता नजर आई। इस पूरे प्राकृतिक एक्शन थ्रिल सीन से नेता लोग उनका मार्केटिंग करने वाले पत्रकार कम कार्यकर्ता और उनके चाइना मेड मोबाइल गायब रहे सारे के सारे शायद राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रोजगार मे व्यस्त हो। पंजाब की बाढ़, कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग मे फंसे सैलानी, नेपाल के गृह युद्ध का शिकार बनाए जा रहे भारतीयों की सहायता करने से भाग खड़े हुए डरपोक मंत्रियों के फर्जी सेवाभाव की पोल खुल चुकी है।
ड्रेनेज के कारण शहर जलमग्न :
केंद्र से सैकड़ों करोड़ रुपया लेकर बनाई भूमिगत जल बहाव प्रणाली नालियों को निगल गई। नालियों के अभाव से बारिश का पानी घरों में घुस रहा है पक्की सड़कें खराब हो रही है। स्मार्ट सिटी का 1500 करोड़ रुपया देने से केंद्र ने मना कर दिया है। देवेन्द्र फडणवीस सरकार सूबे में निकायों के आम चुनाव नहीं चाहती है इस लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आयोग ने ठेंगा दिखाया है। 31 जनवरी 2026 के भीतर सभी निकायों के चुनाव करने होंगे।
