भोपाल में गणेश विसर्जन विवाद: मूर्ति खंडित होने का आरोप षड्यंत्र या सच? तीन मुसलमानों को झूठा फंसाने का दावा, जांच पर उठे सवाल | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल में गणेश विसर्जन विवाद: मूर्ति खंडित होने का आरोप षड्यंत्र या सच? तीन मुसलमानों को झूठा फंसाने का दावा, जांच पर उठे सवाल | New India Times

9 सितंबर 2025 (जो विसर्जन का एक प्रमुख दिन था) लगभग 1 लाख मूर्तियों का पुलिस के देखरेख में विसर्जन कराया गया भोपाल के भारत टॉकीज चौराहे पर पुलिस ने एक बड़ा मंच लगाकर सभी का सम्मान किया। फिर दूसरे दिन धारा 163 लगाई जाती है और उसी दिन गणेश प्रतिमा आरिफ नगर मस्जिद के पास  से निकलते में मूर्ति खंडित की सुनयोजित घटना सामने आती है जो कि पुलिस ने पुष्टि की यह घटना वह तीन मुसलमान ने नहीं की क्योंकि वह उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे। भोपाल के अरिफ नगर इलाके में गणेश मूर्ति विसर्जन जुलूस पर पथराव की घटना झूठी थी। यह जुलूस सोमवार रात को गुजर रहा था, जब हमला हुआ। इससे सांप्रदायिक तनाव फैला और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी एवं अन्य हिंदू संगठनों तथा BJP नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

चंद्रशेखर तिवारी ने पुलिस को धमकी देते हुए कहा कि अब आपको कर्फ्यू का सामना करना पड़ेगा? पुलिस ने प्रारंभिक जांच में तीन संदिग्धों की नाम जद पहचान की, सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि फरियादी और आरोपी के बीच में पुरानी रंजिशें को लेकर थाने में शिकायत दर्ज है।
इस घटना के बाद भोपाल पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 (जो पुरानी CrPC की धारा 144 के समकक्ष है) लगाई। यह धारा सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों आदि पर प्रतिबंध लगाने के लिए इस्तेमाल होती है, ताकि शांति भंग न हो। यह आदेश त्योहारों के मौसम में पहले से ही जारी किया गया था, लेकिन इस घटना के बाद इसे सख्ती से लागू किया गया। पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा ने अपील की कि लोग संयम बरतें और जांच पूरी होने दें।

10 सितंबर को देर रात डीसीपी रियाज इकबाल को हटा दिया जाता है उन्हें रेडियो अधीक्षक पदस्थ कर भेज दिया जाता है।मूर्ति खंडित होने और तीन मुसलमानों को फंसाने का दावा करने वाले और (जिहादी और अल्पसंख्यक)बताने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई क्या यह पक्षपात नहीं है?। स्रोतों में मूर्ति खंडित (या तोड़फोड़) होने की  सीसीटीवी कैमरा एवं प्रत्यक्षदर्शियों से पुलिस को अब तक कुछ नहीं मिला तीन मुसलमानों को “झूठा फंसाने” के इन षडयंत्रों का खुलासा होना चाहिये  BJP विधायक रमेश्वर शर्मा एवं विश्वास सारंग चंद्रशेखर तिवारी ने हमले के लिए “अल्पसंख्यक समुदाय” को ज़िम्मेदार ठहराया, लेकिन पुलिस ने इसे (सांप्रदायिक रंग न) देने की अपील की।

यह दावा सोशल मीडिया पर अफवाहों या पूर्वाग्रहों से प्रेरित लगता है। भोपाल विरासत मंच के संयोजक मोहसिन अली ने कहा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि फिजा खराब ना हो। यह घटना  (यदि हुईं) पूर्व नियोजित षड्यंत्र का हिस्सा हैं। पुलिस ने इसे सामान्य कानून-व्यवस्था की समस्या बताया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉक्टर विक्रम चौधरी ने कहा कि हम कांग्रेस आलाकमान से उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे की त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक तनाव की पुरानी रंजिशें के आधार पर फरियादी ने बे गुनाहागारो को आरोपी बनाते रहे हैं इसकी गंभीर जांच होनी चाहिए।

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