वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

भगवान गौरी-शंकर की आराधना एवं अखंड सौभाग्य की कामना का परम पावन व्रत हरतालिका तीज सोमवार को पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव-पार्वती की पूजा की और अखंड सौभाग्य की मंगलकामना की। हरतालिका तीज को सौभाग्य व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य और कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। यह पर्व माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने हेतु किए गए कठोर तप की स्मृति में मनाया जाता है। निर्जला उपवास रखकर महिलाओं ने पूजा की।
चिकनी मिट्टी से गौरी-शंकर प्रतिमा को अपने हाथों से बनाकर श्रृंगार कर स्थापित किया गया। बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, श्रृंगार सामग्री अर्पित की गई। रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं की भावनाएँ सपना मिश्रा यह व्रत हमारे लिए पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। हर साल हम पूरी श्रद्धा से इसे निभाते हैं। श्रीमती रस्तोगी रानी मिश्रा सामूहिक भजन-कीर्तन करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। हरतालिका तीज व्रत की विशेषताएँ निर्जला उपवास रखा जाता है। सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। रात्रि में जागरण कर पार्वती-व्रत कथा सुनाई जाती है। इस पवित्र पावन पर्व पर एकदूसरे को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि भगवान शिव और माँ पार्वती की कृपा सभी पर बनी रहे तथा सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण हों।
