जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 1.31 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड गायब होने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कार्डधारकों को इलाज के लिए प्रदेश के बाहर भेजा जा रहा है, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। सिंगार ने सवाल उठाया कि प्रदेश में डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवाएं क्या कर रही हैं, जब मरीजों को इलाज के लिए अन्य राज्यों में जाना पड़ रहा है।
यह आरोप मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही अक्सर विवाद का विषय रही है।भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मरीजों को जल्दी डिस्चार्ज करने और उच्च मृत्यु दर के साथ-साथ गैस राहत पल्मोनरी और इंदिरा गांधी महिला प्रसूति विभाग से 80% रेफरल के दावों के संबंध में, उपलब्ध जानकारी और समाचार स्रोतों के आधार पर निम्नलिखित विवरण सामने आता है:
जल्दी डिस्चार्ज के मामले: हमीदिया अस्पताल में मरीजों को समय से पहले डिस्चार्ज करने के कई मामले सामने आए हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं:
सुल्तानिया जनाना अस्पताल में मामला: एक महिला, समरीन पति राशीद, को दो दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। इस तरह के जल्दबाजी में डिस्चार्ज के मामले अस्पताल की अव्यवस्थाओं को उजागर करते हैं। संत रविदास जयंती पर 110 मरीजों का डिस्चार्ज: हमीदिया अस्पताल और संबद्ध सुविधाओं में संत रविदास जयंती के कारण ओपीडी बंद होने पर 110 मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया गया, जिससे आपातकालीन स्थिति में भी मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिली। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि कर्मचारियों की कमी, अव्यवस्था, और संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को जल्दी डिस्चार्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। मृत्यु दर का आंकड़ा (पिछले 1 वर्ष में) पिछले एक वर्ष में हमीदिया अस्पताल में मृत्यु दर के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि कोई भी आधिकारिक स्रोत या सरकारी डेटा इस विशिष्ट समयावधि के लिए व्यापक आंकड़े प्रदान नहीं करता।
हालांकि, कुछ घटनाएं मृत्यु दर की गंभीरता को दर्शाती हैं: वेंटिलेटर की कमी से मृत्यु: एक मामले में, वेंटिलेटर की अनुपलब्धता के कारण एक मरीज को घंटों एंबुलेंस में इंतजार करना पड़ा, और अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई।
डेढ़ माह की बच्ची की मृत्यु: राजगढ़ जिले से लाई गई एक डेढ़ माह की बच्ची की मृत्यु कथित तौर पर डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही के कारण हुई। परिजनों ने स्टाफ पर गलत व्यवहार और अपर्याप्त देखभाल का आरोप लगाया।
जिंदा महिला को मृत घोषित करना: एक गंभीर मामले में, एक दुर्घटना में घायल जिंदा महिला को गलती से मृत घोषित कर मोर्चरी के फ्रीजर में रख दिया गया, जिससे अस्पताल की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। इन घटनाओं से पता चलता है कि मृत्यु दर में वृद्धि के पीछे संसाधनों की कमी, स्टाफ की लापरवाही, और अव्यवस्थित प्रबंधन जैसे कारक हो सकते हैं। हालांकि, पूरे वर्ष का सटीक आंकड़ा अनुपलब्ध है, और इसके लिए सरकारी स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल प्रशासन से आधिकारिक डेटा की आवश्यकता होगी। गैस राहत पल्मोनरी और इंदिरा गांधी महिला प्रसूति विभाग से 80% रेफरल आपके द्वारा उल्लिखित गैस राहत पल्मोनरी और इंदिरा गांधी महिला प्रसूति विभाग से 80% रेफरल का दावा सटीक आंकड़ों के अभाव में पूरी तरह सत्यापित नहीं हो सका।
हालांकि, निम्नलिखित बिंदु इस संदर्भ में प्रासंगिक हैं:
रेफरल की प्रवृत्ति: हमीदिया अस्पताल में संसाधनों की कमी, जैसे वेंटिलेटर, बेड, और विशेषज्ञ कर्मचारियों की अनुपलब्धता, के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों, जैसे नोबल अस्पताल, में रेफर करने की शिकायतें सामने आई हैं। यह रेफरल प्रक्रिया विशेष रूप से गंभीर मामलों में देखी गई है, जैसे पल्मोनरी या प्रसूति संबंधी जटिलताओं में।
अव्यवस्था और संसाधन की कमी: गैस राहत और इंदिरा गांधी महिला प्रसूति विभाग में बुनियादी सुविधाओं, जैसे एंबुलेंस और वार्ड बॉय, की कमी की खबरें हैं। उदाहरण के लिए, निजी एंबुलेंस पर प्रतिबंध और अस्पताल की एंबुलेंस द्वारा अधिक शुल्क वसूलने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसके कारण मरीजों को रेफरल के लिए मजबूर किया जाता है।
80% रेफरल का दावा: इस दावे के लिए कोई प्रत्यक्ष स्रोत या आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह संभव है कि यह अनुमानित या अतिशयोक्तिपूर्ण हो, लेकिन अस्पताल की अव्यवस्थाओं (जैसे स्टाफ की कमी और बुनियादी ढांचे की खराबी) के कारण रेफरल की दर अधिक होने की संभावना है।
अतिरिक्त टिप्पणियां
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति: हमीदिया अस्पताल में बार-बार सामने आने वाली घटनाएं, जैसे मरीजों को परिजनों द्वारा स्ट्रेचर पर ढकेलना, स्टाफ की कमी, और मारपीट की घटनाएं, यह दर्शाती हैं कि अस्पताल प्रबंधन और संसाधनों में गंभीर सुधार की आवश्यकता है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में हमीदिया अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और मरीजों को सभी सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए, जो इस बात का संकेत है कि सरकार भी इन समस्याओं से अवगत है।
सुधार की आवश्यकता: अस्पताल में दलालों का जाल, स्टाफ की लापरवाही, और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को तत्काल संबोधित करने की जरूरत है।
निष्कर्ष: हमीदिया अस्पताल में जल्दी डिस्चार्ज और रेफरल की उच्च दर की समस्या वास्तविक है, जो संसाधनों की कमी और प्रबंधन की खामियों से जुड़ी है। हालांकि, पिछले एक वर्ष में मृत्यु दर के सटीक आंकड़े और 80% रेफरल के दावे को सत्यापित करने के लिए और अधिक आधिकारिक डेटा की आवश्यकता है। इन मुद्दों के समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
